बीकानेर पीसीपीएनडीटी टीम की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा में अवैध भ्रूण लिंग जांच गिरोह का भंडाफोड़
बीकानेर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, प्रमुख शासन सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम के निर्देशों पर बीकानेर पीसीपीएनडीटी टीम ने हरियाणा के डबवाली में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए डिकॉय ऑपरेशन में एक दलाल को गिरफ्तार किया है। करीब छह माह की लगातार रैकी और गोपनीय निगरानी के बाद यह कार्रवाई सफल रही, जबकि एक अन्य दलाल की तलाश जारी है।
मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि गिरोह की गतिविधियों पर पिछले छह माह से नजर रखी जा रही थी। बीकानेर और श्रीगंगानगर की टीम ने पहले दो बार कार्रवाई का प्रयास किया, लेकिन आरोपी हर बार बच निकला। तीसरे प्रयास में संयुक्त निदेशक बीकानेर जोन डॉ. देवेंद्र चौधरी के नेतृत्व में सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध, पीसीपीएनडीटी प्रभारी महेंद्र सिंह चारण और टीम की रणनीति सफल रही।
डिकॉय गर्भवती महिला के माध्यम से दलाल से संपर्क किया गया। आरोपी ने भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए 36,500 रुपये की मांग की और महिला को हरियाणा के डबवाली स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया। पूरी कार्रवाई के दौरान टीम ने निगरानी रखी और दलाल को रंगे हाथों पकड़ लिया।
बिना जांच फर्जी रिपोर्ट का खेल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी भ्रूण लिंग जांच के नाम पर लोगों को गुमराह करता था। अधिकांश मामलों में गर्भ में बेटी होने की झूठी जानकारी देकर गर्भपात के लिए प्रेरित किया जाता था। स्वास्थ्य विभाग को आशंका है कि इस अवैध नेटवर्क के कारण अब तक बड़ी संख्या में अजन्मे बच्चों की जान गई हो सकती है।
महेंद्र सिंह चारण की रही अहम भूमिका
पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में बीकानेर जिला पीसीपीएनडीटी प्रभारी महेंद्र सिंह चारण की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने छह माह तक लगातार रैकी, मुखबिर तंत्र विकसित करने, गोपनीय सूचनाएं जुटाने और गिरोह की गतिविधियों पर निगरानी रखी। डिकॉय ऑपरेशन की योजना तैयार करने और विभिन्न जिलों की टीमों के बीच समन्वय स्थापित करने में भी उनकी अहम भूमिका रही।
दो बार पुलिस को चकमा दे चुका था आरोपी
मुख्य आरोपी राजेश बेहद शातिर बताया जा रहा है। वह कार्रवाई से पहले गर्भवती महिला और उसके परिजनों का पूरा सत्यापन करता था तथा स्वयं सामने आने के बजाय केवल फोन पर संपर्क रखता था। इस बार भी उसने नकद राशि लेने से इनकार कर ऑनलाइन भुगतान कराया, लेकिन बीकानेर टीम की रणनीति के आगे उसकी चालाकी नहीं चल सकी।
फिलहाल मामले में अस्पताल और पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।




