बीकानेर निकाय चुनाव में BJP का बड़ा दांव! 6 सितंबर को उतरेंगे CM भजनलाल, कांग्रेस की लोकल रणनीति से मुकाबला
बीकानेर: नगरीय निकाय चुनाव में मतदान की तारीख नजदीक आते ही बीकानेर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। चुनावी मुकाबले के अंतिम दौर में भारतीय जनता पार्टी ने अपने सबसे बड़े चेहरे के रूप में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को प्रचार के मैदान में उतारने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में रोड शो के जरिए मतदाताओं से वोट की अपील करेंगे।
दूसरी ओर कांग्रेस ने इस चुनाव में राज्य या केंद्रीय स्तर के बड़े चेहरों की बजाय स्थानीय नेतृत्व, वार्ड प्रत्याशियों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताने की रणनीति अपनाई है। ऐसे में बीकानेर का चुनाव अब हाई-प्रोफाइल प्रचार बनाम ग्राउंड लेवल नेटवर्क की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा के प्रचार अभियान में CM भजनलाल की एंट्री
भाजपा ने अंतिम चरण के प्रचार अभियान को हाई-वोल्टेज बनाने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मेगा रोड शो और केंद्रीय मंत्रियों के सघन जनसंपर्क के जरिए पार्टी हर बूथ तक अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है। पार्टी का फोकस नाराज कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्तर पर कमजोर माने जा रहे क्षेत्रों को भी सक्रिय करने पर है।
6 सितंबर को बीकानेर में CM का रोड शो
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 6 सितंबर को बीकानेर में रोड शो कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि रोड शो गोकुल सर्किल से शुरू होकर बारह गुवाड़, मोहता चौक और तेलीवाड़ा होते हुए कोटगेट से सादुलसिंह सर्किल तक जाएगा।
हालांकि मुख्यमंत्री के बीकानेर दौरे और रोड शो का अधिकृत कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में रूट और कार्यक्रम में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने की भी कोशिश?
बीकानेर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में नाराजगी और बगावत की स्थिति सामने आई है। ऐसे में मुख्यमंत्री के रोड शो को केवल प्रचार अभियान तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि रोड शो के बाद पार्टी नेतृत्व स्थानीय स्तर पर नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद कर उन्हें चुनाव में सक्रिय करने की कोशिश कर सकता है।
रोड शो के साथ संगठन पर भी फोकस
भाजपा की रणनीति में केवल रोड शो और जनसभाएं ही शामिल नहीं हैं। पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रदेश नेता अलग-अलग जिलों में संगठनात्मक बैठकें भी कर रहे हैं। इन बैठकों में बूथ कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और स्थानीय स्तर की समस्याओं को समझने पर फोकस किया जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में गुटबाजी या संगठनात्मक कमजोरी है तो उसे चुनाव से पहले दूर करने की कोशिश की जा रही है। केंद्रीय चुनाव संचालक, सह-संचालक और राष्ट्रीय पदाधिकारी भी चुनावी क्षेत्रों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्रियों को भी वार्डों की जिम्मेदारी
भाजपा ने अपने केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है। मंत्रियों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों और स्थानीय मुद्दों के आधार पर विशिष्ट वार्डों एवं नगर निकायों में प्रचार और संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
कांग्रेस का फोकस स्थानीय चेहरे और मोहल्ला कनेक्ट
भाजपा के हाई-प्रोफाइल प्रचार अभियान के मुकाबले कांग्रेस ने इस बार स्थानीय नेतृत्व पर ज्यादा भरोसा किया है। पार्टी प्रत्याशी और स्थानीय कार्यकर्ता मोहल्ला स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि वार्ड स्तर के मुद्दे, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत साख और स्थानीय नेटवर्क चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
कांग्रेस की रणनीति में बड़े नेताओं की रैलियों के बजाय स्थानीय कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर दिखाई दे रहा है। पार्टी को उम्मीद है कि स्थानीय समस्याओं और वार्ड स्तर के मुद्दों को केंद्र में रखकर वह भाजपा के बड़े प्रचार अभियान की काट तैयार कर सकती है।
मुख्यमंत्री की ब्रैंडिंग भारी पड़ेगी या लोकल नेटवर्क?
बीकानेर निकाय चुनाव के अंतिम दौर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री समेत भाजपा के बड़े नेताओं की हाई-प्रोफाइल ब्रैंडिंग मतदाताओं पर कितना असर डालती है और कांग्रेस का स्थानीय नेटवर्क उसके सामने कितना मजबूत साबित होता है।
भाजपा के लिए मुख्यमंत्री का रोड शो कार्यकर्ताओं में जोश भरने और नाराजगी को कम करने का बड़ा मौका होगा। वहीं कांग्रेस के सामने स्थानीय मुद्दों और वार्ड प्रत्याशियों की पकड़ को वोट में बदलने की चुनौती है। अब चुनावी प्रचार के अंतिम दिनों में दोनों दलों की रणनीति किस तरह रंग लाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।





