राजस्थान में मानसून ने लिया ब्रेक! 15 शहरों में पारा 35 पार, जानें कब फिर होगी बारिश
राजस्थान। मानसून आने के बाद शुक्रवार ऐसा पहला दिन रहा, जब प्रदेश में कहीं भी बारिश दर्ज नहीं हुई। बारिश नहीं होने और दिनभर तेज धूप रहने से गर्मी और उमस का असर एक बार फिर बढ़ गया। जयपुर, टोंक, अलवर समेत प्रदेश के 15 शहरों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया।
सबसे ज्यादा गर्मी श्रीगंगानगर में रही, जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान में मानसून का यह ब्रेक सितंबर के पहले सप्ताह तक बना रह सकता है। हालांकि 4 से 5 सितंबर के आसपास मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।
राजस्थान में मानसून का ब्रेक, गर्मी और उमस बढ़ी
शुक्रवार को जयपुर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर, अजमेर और जोधपुर संभाग के अधिकांश क्षेत्रों में आसमान साफ रहा और तेज धूप निकली। कई स्थानों पर तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक का उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
बारिश नहीं होने से दिन के समय गर्मी और उमस बढ़ गई। खासकर उन क्षेत्रों में लोगों को ज्यादा परेशानी हुई जहां पिछले कुछ दिनों से मानसूनी गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं।
17 जिलों में सूखे जैसे हालात
इस साल राजस्थान में मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण कई जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है। जानकारी के अनुसार जयपुर सहित करीब 17 जिलों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं।
प्रदेश में इस साल सबसे कम बारिश पाली जिले में दर्ज की गई है। इसके अलावा जालोर, बांसवाड़ा, जैसलमेर और उदयपुर भी कम बारिश वाले प्रमुख जिलों में शामिल बताए जा रहे हैं। कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ रही है और कई इलाकों में फसलों के लिए सिंचाई की जरूरत बढ़ गई है।
4-5 सितंबर से फिर सक्रिय हो सकता है मानसून
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर के पहले सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में एक नया वेदर सिस्टम बनने की संभावना है। इस सिस्टम के प्रभाव से राजस्थान में 4 से 5 सितंबर के आसपास मानसून की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं।
वर्तमान में मानसून ट्रफ उत्तर की ओर शिफ्ट होकर अमृतसर, देहरादून और लखीमपुर खीरी होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। आगामी दिनों में इसके सामान्य स्थिति में आने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद राजस्थान में बादल बनने और बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
जयपुर में तेज धूप, पारा पहुंचा 35.4 डिग्री
जयपुर में शुक्रवार को दिनभर तेज धूप रही, जिससे गर्मी और उमस का असर देखने को मिला। यहां अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार आने वाले तीन से चार दिन तक जयपुर में मौसम लगभग इसी तरह बना रह सकता है।
शहर में हल्के बादलों की आवाजाही जरूर रही, लेकिन बारिश नहीं हुई।
अलवर और जोधपुर में भी बढ़ी गर्मी
अलवर में शुक्रवार सुबह से ही तेज धूप खिली रही। मौसम साफ रहने से दिनभर गर्मी और उमस महसूस की गई। यहां अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
जोधपुर में भी सुबह हल्के बादल दिखाई दिए, लेकिन दोपहर बाद तेज धूप निकलने से उमस बढ़ गई। यहां अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.9 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस रहा।
सीकर में पारा पहुंचा 38 डिग्री
सीकर में शुक्रवार को अधिकांश समय मौसम साफ रहा और तेज धूप देखने को मिली। यहां अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रहा।
बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण दिन के तापमान में तेजी देखी जा रही है।
अजमेर और कोटा में भी नहीं बरसे बादल
अजमेर में पिछले दो दिनों से बारिश नहीं हुई है। शुक्रवार को भी सुबह बादलों की आवाजाही और हवा चलती रही, लेकिन बारिश नहीं हुई। बीच-बीच में धूप निकलने से लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। यहां अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कोटा में सुबह बादल छाए रहे, लेकिन दोपहर में धूप निकलने के बाद तापमान में करीब दो डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यहां अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
उदयपुर में मौसम सुहावना, लेकिन बारिश नहीं
उदयपुर में शुक्रवार को मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहा। कुछ समय के लिए हल्के बादल छाए, लेकिन बारिश नहीं हुई। यहां अधिकतम तापमान 31.7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
प्रदेश में मानसून की गतिविधियां कमजोर होने से फिलहाल लोगों को बारिश के लिए कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है। यदि बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया वेदर सिस्टम सक्रिय होता है तो सितंबर के पहले सप्ताह के अंतिम दिनों में राजस्थान में एक बार फिर मानसून की बारिश देखने को मिल सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 4-5 सितंबर के बाद मानसून की वापसी कितनी मजबूत होती है और क्या कम बारिश वाले जिलों को राहत मिल पाएगी?





