बुजुर्ग-दिव्यांग वोटरों को झटका! घर पर वोटिंग नहीं, पर्ची भी नहीं देगा आयोग
बीकानेर। स्थानीय निकाय चुनाव में बीकानेर के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को मतदान के लिए बूथ तक जाना होगा। लोकसभा चुनाव की तरह इस बार घर पर मतदान की सुविधा नहीं दी गई है। इतना ही नहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाताओं के घर वोट की पर्ची भी नहीं पहुंचाई जाएगी। ऐसे में प्रत्याशी अपने स्तर पर पर्चियां बांट रहे हैं और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी खुद संभाल रहे हैं।
लोकसभा की तरह घर पर नहीं होगी वोटिंग
अगर किसी परिवार में बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता है तो इस बार उन्हें मतदान केंद्र तक ले जाना परिवार की जिम्मेदारी होगी। स्थानीय निकाय चुनाव में घर पर पोलिंग की सुविधा नहीं मिलेगी।
बीकानेर में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर-घर मतदान की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत मतदान दल मतदाता के घर पहुंचता था और पूरी गोपनीयता के साथ वोट करवाया जाता था।
इस बार भी कई परिवारों को उम्मीद थी कि बुजुर्ग मतदाताओं का वोट घर पर ही कराया जाएगा, लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव में ऐसी सुविधा नहीं दी गई है। अब बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को बूथ तक पहुंचकर ही मतदान करना होगा।
निर्वाचन आयोग की वोटर पर्ची भी नहीं आएगी
स्थानीय निकाय चुनाव में मतदाताओं के लिए एक और बदलाव देखने को मिल रहा है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह इस बार निर्वाचन आयोग की ओर से घर-घर वोटर पर्ची नहीं भेजी जा रही है।
ऐसे में प्रत्याशी खुद अपने स्तर पर पर्चियां तैयार करवाकर मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं। कांग्रेस, भाजपा के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी अपने-अपने वार्ड में घर-घर जाकर मतदाताओं को पर्चियां वितरित कर रहे हैं।
एक-एक वोटर पर प्रत्याशियों की नजर
स्थानीय निकाय चुनाव में वार्ड स्तर पर मतदाताओं की संख्या सीमित होती है। एक वार्ड में करीब चार से आठ हजार तक वोट होने के कारण प्रत्याशियों के लिए हर वोट महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि उम्मीदवार एक-एक मतदाता से संपर्क करने में जुटे हुए हैं।
बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने के लिए भी प्रत्याशी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। हालांकि मतदान केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर परिवारों की भूमिका भी अहम रहेगी।
मतदान बढ़ाने के प्रयास इस बार सीमित
वार्ड स्तर के चुनाव में आमतौर पर मतदान प्रतिशत लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तुलना में अलग परिस्थितियों में होता है। इस बार मतदान बढ़ाने के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव जैसी व्यापक गतिविधियां नजर नहीं आ रही हैं।
जिला प्रशासन की ओर से कुछ औपचारिक जागरूकता कार्यक्रम जरूर किए जा रहे हैं। संवाद जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं, लेकिन बड़े चुनावों की तरह व्यापक स्तर पर मतदाता जागरूकता अभियान दिखाई नहीं दे रहा है।
बूथ तक पहुंचाना परिवार और प्रत्याशियों के लिए चुनौती
घर पर मतदान की सुविधा नहीं होने से सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों के सामने है, जिनमें बुजुर्ग या दिव्यांग मतदाता हैं। ऐसे मतदाताओं को मतदान केंद्र तक ले जाने के लिए परिवार को व्यवस्था करनी होगी। दूसरी ओर, प्रत्याशी भी अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।
कुल मिलाकर इस बार बीकानेर के स्थानीय निकाय चुनाव में बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को घर बैठे मतदान की सुविधा नहीं मिलेगी। वहीं निर्वाचन आयोग की वोटर पर्ची भी घर तक नहीं पहुंचने से प्रत्याशियों की सक्रियता और बढ़ गई है।





