बीकानेर निगम का अजीब ‘जुगाड़’: पानी निकालने के लिए लगाया ट्रैक्टर, लेकिन वापस उसी नाले में लौट रहा पानी! 48 हजार रुपये खर्च
बीकानेर। मानसून से पहले नालों की सफाई और जलभराव रोकने के दावों के बीच नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। निगम कार्यालय के पास लगाए गए ट्रैक्टर पंप से पानी निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन तकनीकी खामी के कारण पानी वापस उसी नाले में लौट रहा है।
नाले से पानी निकला नहीं, घूमकर वापस पहुंच रहा
जानकारी के अनुसार निगम दफ्तर के पास डेयरी बूथ के पास दो ट्रैक्टर पंप लगाए गए हैं। इनमें एक नगर निगम और दूसरा बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) का है।
नगर निगम का ट्रैक्टर मुख्य नाले से पानी खींचकर पाइप के जरिए पास बने छोटे नाले में डाल रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उस छोटे नाले का ढलान वापस मुख्य नाले की तरफ है, जिससे निकाला गया पानी फिर उसी नाले में वापस पहुंच जाता है।
15 दिन में खर्च हुए 48 हजार रुपये
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दिनों से ट्रैक्टर चलने के बावजूद नाले के पानी के स्तर में कोई कमी नहीं आई है। इस ट्रैक्टर के लिए ठेकेदार को प्रतिदिन करीब 3200 रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
पिछले करीब 15 दिनों में इस व्यवस्था पर लगभग 48 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर समस्या जस की तस बनी हुई है।
BDA का ट्रैक्टर दिखा रहा सही तरीका
नगर निगम के ट्रैक्टर के पास ही बीकानेर विकास प्राधिकरण का ट्रैक्टर पंप भी लगाया गया है। बताया जा रहा है कि BDA का ट्रैक्टर पानी को सीधे सीवरेज लाइन में डाल रहा है, जिससे पानी आगे निकल रहा है और ओवरफ्लो की समस्या कम हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम भी इसी तरह व्यवस्था कर सकता है, लेकिन मौके पर निगरानी करने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी दिखाई नहीं दे रहा है।
अधिकारियों की निगरानी पर उठे सवाल
लोगों का आरोप है कि मौके पर न तो जेईएन पहुंच रहे हैं और न ही एईएन यह देखने आ रहे हैं कि लगाए गए संसाधनों से वास्तव में फायदा हो रहा है या नहीं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मानसून में जलभराव रोकने के लिए लगाए गए संसाधनों का सही उपयोग होना चाहिए, ताकि जनता के पैसे का दुरुपयोग न हो।
अब देखना होगा कि नगर निगम इस मामले में क्या सुधारात्मक कदम उठाता है और नाले की समस्या का स्थायी समाधान कब तक होता है।




