बीकानेर में बागियों पर गिरेगी गाज, कांग्रेस ने बनाई सूची; रिजल्ट के बाद कार्रवाई
बीकानेर। बीकानेर नगर निगम चुनाव खत्म होने के साथ ही अब राजनीतिक दलों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे बागियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों की सूची तैयार कर ली है, जिन्होंने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के सामने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। पार्टी की ओर से जल्द ही इन्हें नोटिस जारी किए जाने की संभावना है।
उधर, भाजपा में भी बागी प्रत्याशियों पर कार्रवाई की तैयारी है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी उच्च पदाधिकारियों के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों दलों में संगठनात्मक कार्रवाई तेज होने के संकेत हैं।
कांग्रेस में पूर्व महासचिव तक मैदान में उतरे
कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं की है, जो संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और इसके बावजूद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनाव मैदान में उतर गए। इनमें पूर्व संगठन महासचिव रहे रमजान अली कच्छावा और आनन्द जोशी प्रमुख नाम हैं।
रमजान कच्छावा ने वार्ड 80 से बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। वहीं आनन्द जोशी वार्ड 73 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। वार्ड 73 को चुनाव से पहले बीकानेर की सबसे हॉट सीटों में माना जा रहा था। यहां कांग्रेस ने अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था।
वार्ड 73 में कांग्रेस के वोटों पर असर?
आनन्द जोशी के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने से वार्ड 73 में कांग्रेस के वोटों के बंटने की चर्चा रही। कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला के सामने जोशी की मौजूदगी को पार्टी के लिए चुनौती के तौर पर देखा गया। अब चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा कि बागी प्रत्याशी की मौजूदगी का अधिकृत प्रत्याशी के प्रदर्शन पर कितना असर पड़ा।
एससी प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष भी बागी
कांग्रेस में एससी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रहे प्रफुल्ल हटीला भी वार्ड 71 से बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे। संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाले हटीला से कांग्रेस को एससी वर्ग के वोटों को पार्टी के पक्ष में जोड़ने की उम्मीद थी। ऐसे में उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने को पार्टी संगठन के लिए झटका माना जा रहा है।
पूर्व पार्षद शिवशंकर बिस्सा ने भी लड़ा चुनाव
कांग्रेस से पार्षद रह चुके और पूर्व सचिव शिवशंकर बिस्सा ने वार्ड 2 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इस वार्ड में कांग्रेस ने संजय आचार्य को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। चुनाव के दौरान बिस्सा और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच वोटों के बंटवारे का मुद्दा चर्चा में रहा।
इसी तरह वार्ड 80 में वसीम खिलजी भी चुनाव मैदान में उतरे। वसीम पहले पार्षद रह चुके हैं और पार्टी में सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वार्ड 80 में यूथ कांग्रेस के सचिव रह चुके पार्षद शहाबुद्दीन के चुनाव मैदान में उतरने से भी पार्टी के सामने बागियों का सवाल खड़ा हुआ।
इन नेताओं पर भी कार्रवाई की तैयारी
कांग्रेस के भीतर बागी प्रत्याशियों की सूची में कई अन्य नाम भी शामिल हैं। कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के सचिव रह चुके सलीम मांगलिया ने वार्ड 31 से निर्दलीय चुनाव लड़ा। वहीं सचिव मुजीब खिलजी वार्ड 25 से चुनाव मैदान में उतरे। प्रदेश महिला सचिव आशा देवी स्वामी भी पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थीं।
पार्टी संगठन अब इन सभी मामलों को चुनाव परिणाम के बाद अनुशासन के स्तर पर देखने की तैयारी कर रहा है।
रिजल्ट के बाद नोटिस, फिर सख्त कार्रवाई
शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल ने कहा है कि बागी प्रत्याशियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पार्टी चुनाव परिणाम का इंतजार कर रही है। इसके बाद पार्टी की ओर से बगावत करने वाले नेताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की बात कही गई है।
राजनीतिक दलों में बगावत को संगठन के अनुशासन के खिलाफ माना जाता है। ऐसे में परिणाम सामने आने के बाद नोटिस, जवाब और उसके बाद संगठनात्मक कार्रवाई का दौर शुरू हो सकता है।
अब नतीजे बताएंगे किस बागी ने कितना नुकसान किया
बीकानेर नगर निगम चुनाव में कई वार्डों में अधिकृत प्रत्याशियों के सामने पार्टी से जुड़े नेताओं के निर्दलीय चुनाव लड़ने से मुकाबला दिलचस्प हुआ है। अब 14 सितंबर को आने वाले परिणामों के बाद यह तस्वीर साफ होगी कि किन वार्डों में बागी प्रत्याशियों ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के समीकरण को प्रभावित किया।
इसके बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने संगठन को मजबूत रखने और भविष्य में बगावत रोकने की चुनौती भी रहेगी।





