टिकट की जंग में बड़े नेताओं ने बंद किए मोबाइल! बीकानेर में बागियों का रैला, भाजपा-कांग्रेस की बढ़ी टेंशन
बीकानेर। नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण के साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के सामने कार्यकर्ताओं की नाराजगी बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदार अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर दबाव बनाने में जुटे हैं। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि टिकट के लिए लगातार आ रहे फोन कॉल से परेशान होकर दोनों दलों के कुछ बड़े नेताओं ने अपने मोबाइल तक बंद कर दिए हैं।
कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि चुनावी समय में जब उन्हें वरिष्ठ नेताओं की जरूरत है तो कई नेता उनके फोन नहीं उठा रहे हैं। नाराज कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी और नेताओं के लिए वे हर समय तैयार रहते हैं, लेकिन टिकट वितरण के समय उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
टिकट की खींचतान के बीच नेताओं पर बढ़ा दबाव
नगर निगम चुनाव में टिकट पाने के लिए दोनों प्रमुख दलों में बड़ी संख्या में दावेदार सामने आए हैं। एक टिकट के लिए कई-कई कार्यकर्ता दावेदारी कर रहे थे। ऐसे में जब किसी एक को पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार बनाया गया तो टिकट से वंचित रहे कई दावेदारों और उनके समर्थकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टिकट वितरण के बाद कई कार्यकर्ता वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में लगातार बने हुए हैं और अपनी नाराजगी दर्ज करा रहे हैं। लगातार कॉल और मुलाकातों के कारण पार्टी नेताओं पर भी दबाव बढ़ गया है।
श्याम पंचारिया डेंगू के कारण टिकट प्रक्रिया से दूर
देहात भाजपा अध्यक्ष श्याम पंचारिया के डेंगू से पीड़ित होने के कारण उनके टिकट वितरण की व्यवस्था से खुद को अलग रखने की जानकारी सामने आई है। वहीं शहर भाजपा अध्यक्ष सुमन छाजेड़ के निवास के बाहर भी टिकट नहीं मिलने से नाराज कुछ कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
टिकट वितरण के बाद भाजपा के भीतर संभावित असंतोष को संभालना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकता है।
कांग्रेस नेताओं के सामने भी कार्यकर्ताओं का विरोध
केवल भाजपा ही नहीं, कांग्रेस में भी टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ता नेताओं के सामने अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के समक्ष भी कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा टिकट नहीं मिलने को लेकर नाराजगी जताए जाने की बात सामने आई है।
वहीं पार्टी के पूर्व अध्यक्ष यशपाल गहलोत को भी कार्यकर्ताओं के विरोध और नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। टिकट वितरण के बाद कांग्रेस के सामने भी नाराज दावेदारों को मनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
बागी उम्मीदवारों का बढ़ सकता है रैला
टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा और कांग्रेस के कई दावेदार अब बागी होकर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर सकते हैं। बड़ी संख्या में दावेदारों के सामने आने के कारण दोनों दलों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
किसी भी वार्ड में पार्टी केवल एक व्यक्ति को टिकट दे सकती थी। ऐसे में जिन वार्डों में दावेदारों की संख्या अधिक थी, वहां टिकट वितरण के बाद विरोध और बगावत की संभावना भी ज्यादा दिखाई दे रही है।
अपनों से ही मुकाबला, रोचक होगा चुनाव
बीकानेर शहर के अंदरूनी क्षेत्रों में नगर निगम चुनाव का मुकाबला खासा रोचक होने की संभावना है। कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ता एक-दूसरे के सामने चुनाव लड़ सकते हैं।
वहीं टिकट से वंचित दावेदार यदि निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरते हैं तो वे अपनी ही पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। राजनीतिक समीकरणों में ऐसे बागी उम्मीदवार वोटों का बंटवारा कर चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा और कांग्रेस अपने नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में कितनी सफल होती हैं और कितने दावेदार पार्टी लाइन से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करते हैं। नगर निगम चुनाव में टिकट की जंग अब केवल उम्मीदवारों की घोषणा तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोनों प्रमुख दलों के लिए बगावत को रोकना भी बड़ी चुनौती बन गई है।
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