बीकानेर की स्वच्छता रैंकिंग पर संकट! सर्वे टीम के सामने ही सड़कों पर बहा सीवरेज का गंदा पानी

19 Jun 2026 BIKANER
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बीकानेर की स्वच्छता रैंकिंग पर संकट! सर्वे टीम के सामने ही खुली नगर निगम की पोल

बीकानेर। क्या इस बार बीकानेर की स्वच्छता रैंकिंग सीवरेज और नालों के गंदे पानी में डूब जाएगी? शहर के मौजूदा हालात देखकर यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण की पहली और सबसे अहम टीम बीकानेर नगर निगम क्षेत्र का निरीक्षण पूरा कर लौट चुकी है।

चिंता की बात यह रही कि जिस समय सर्वे टीम शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा ले रही थी, उसी दौरान कई इलाकों में नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। नगर निगम कार्यालय के सामने तक नालों का गंदा पानी सड़कों पर जमा दिखाई दिया।

स्वच्छता सर्वेक्षण का पहला चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कुल रैंकिंग के 10,500 अंक शामिल हैं। पांच सदस्यों की टीम ने पांच दिनों तक शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर सफाई व्यवस्था, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, वेस्ट मैनेजमेंट, बाजारों की सफाई और सार्वजनिक सुविधाओं का निरीक्षण किया।

बारिश ने खोली निगम के दावों की पोल

सर्वे टीम के दौरे के दौरान हुई बारिश ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी। श्रीगंगानगर चौराहा और म्यूजियम सर्किल जैसे प्रमुख इलाकों में जलभराव और कीचड़ की स्थिति देखने को मिली।

शहरवासियों का कहना है कि सर्वे टीम ने बीकानेर की यह तस्वीर खुद देखी है, जिसका असर स्वच्छता रैंकिंग पर पड़ सकता है।

सूरसागर रोड पर महीनों से बह रहा नाले का पानी

नगर निगम से सूरसागर जाने वाली सड़क पर पिछले कई महीनों से नाले का गंदा पानी बहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों के अनुसार कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

अब आएंगी दो और सर्वे टीमें

पहले चरण के बाद अब स्वच्छता सर्वेक्षण के अगले चरण भी होने हैं। दूसरे चरण में गार्बेज फ्री सिटी के तहत शहर के कचरा प्रबंधन और डंपिंग साइट की स्थिति जांची जाएगी। यह चरण 1000 अंकों का होगा।

तीसरे चरण में सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, खुले में शौच और स्वच्छता सुविधाओं का निरीक्षण किया जाएगा।

म्यूजियम और श्रीगंगानगर चौराहे पर हर साल वही समस्या

शहर के प्रमुख चौराहों पर जलभराव की समस्या को लेकर लोगों का कहना है कि गलत ड्रेनेज प्लानिंग इसका बड़ा कारण है। हल्की बारिश में ही पानी जमा हो जाता है और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अब देखना होगा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में बीकानेर को क्या स्थान मिलता है, लेकिन सर्वे टीम के दौरे के समय सामने आए हालात ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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