बीकानेर जिला परिषद का सियासी इतिहास: 1959 से जिला प्रमुख की कुर्सी पर कांग्रेस का दबदबा, भाजपा के सामने रिकॉर्ड बदलने की चुनौती
बीकानेर। प्रदेश में सत्ता भारतीय जनता पार्टी की रही हो या कांग्रेस की, बीकानेर जिला परिषद में जिला प्रमुख की कुर्सी पर कांग्रेस का दबदबा बना रहने का दावा किया जाता रहा है। वर्ष 1959 से अब तक जिला परिषद के राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस का प्रभाव रहा है। भाजपा अब तक यहां जिला प्रमुख का पद हासिल नहीं कर पाई है।
अब एक बार फिर प्रदेश में भाजपा की सरकार है और पार्टी जिला प्रमुख बनाने की कोशिश में जुटी है। दूसरी ओर कांग्रेस अपने पुराने राजनीतिक अनुभव के दम पर इस पद पर अपना प्रभाव बनाए रखने की रणनीति बना रही है। पार्टी अपने जिला परिषद सदस्य प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कोशिश में है। ऐसे में इस बार का चुनाव केवल संख्या बल तक सीमित नहीं है, बल्कि बीकानेर के पुराने राजनीतिक इतिहास और नए सियासी समीकरणों से भी जुड़ गया है।
इस बार जिला परिषद में 41 वार्ड
परिसीमन के बाद बीकानेर जिला परिषद में वार्डों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। वहीं, इस बार जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में किसी भी वर्ग की महिला जिला परिषद सदस्य इस पद पर चुनी जा सकती है।
कब कौन बना जिला प्रमुख?
बीकानेर जिला परिषद के करीब 66 साल के इतिहास में अब तक 14 जिला प्रमुख बनने का उल्लेख मिलता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- प्रेम सिंह – वर्ष 1960 से 1965 तक
- गिरधारी लाल भोबिया – दो बार
- कांता खतूरिया – दो बार
- भवानीशंकर शर्मा
- पूर्णाराम चौहान
- सुनीता तर्ड
- रामेश्वर डूडी – दो बार
- नारायण – कार्यवाहक
- मेघाराम महिया
- सुशीला सींवर
- मोडाराम – दिसंबर 2020 में निर्वाचित
तीन नेता दो-दो बार बने जिला प्रमुख
बीकानेर जिला परिषद में तीन ऐसे नेता रहे हैं, जिन्हें दो-दो बार जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिला। इनमें गिरधारी लाल भोबिया, कांता खतूरिया और रामेश्वर डूडी शामिल हैं। इन नेताओं ने अलग-अलग कार्यकाल में जिला परिषद का नेतृत्व किया।
तीन महिला नेताओं के नाम इतिहास में दर्ज
बीकानेर जिला परिषद में अब तक तीन महिला नेताओं ने जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली है। इनमें कांता खतूरिया, सुनीता तर्ड और सुशीला सींवर के नाम शामिल हैं।
कांता खतूरिया ने पहली बार 1980 से 1985 तक जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया। इसके बाद 1985 से 1987 तक उन्होंने दोबारा यह जिम्मेदारी संभाली। इस तरह वह दो बार जिला प्रमुख बनने वाली महिला जनप्रतिनिधि रहीं।
इसके बाद सुनीता तर्ड ने वर्ष 2000 से 2005 तक जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया। वहीं, सुशीला सींवर ने वर्ष 2015 से 2020 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली। इस प्रकार तीन महिला नेताओं ने कुल चार कार्यकाल में जिला परिषद का नेतृत्व किया।
इस बार पांचवीं बार महिला जिला प्रमुख बनने का अवसर
वर्ष 2026 में जिला प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित होने के कारण बीकानेर जिला परिषद को एक बार फिर महिला नेतृत्व मिलने का रास्ता साफ है। अब तक तीन महिला नेताओं के चार कार्यकाल के बाद यह पांचवां अवसर होगा, जब महिला जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेगी।
एक ओर भाजपा जिला परिषद में अपना राजनीतिक इतिहास बनाने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर कांग्रेस अपने पुराने प्रभाव को कायम रखने के लिए रणनीति बना रही है। 41 वार्डों के चुनावी नतीजों के बाद जिला प्रमुख की कुर्सी किसके हिस्से आएगी, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।
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