गोडावण को बचाने की बड़ी पहल, रामदेवरा में शुरू हुई री-वाइल्डिंग प्रक्रिया

04 Oct 2026 BIKANER
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रामदेवरा। लुप्त होने के कगार पर पहुंचे राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल शुरू हुई है। रामदेवरा में तैयार किए गए गोडावण एवियरी और सॉफ्ट रिलीज सेंटर का केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जोधपुर से वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने कृत्रिम संवर्धन और प्रजनन तकनीक से तैयार गोडावणों की री-वाइल्डिंग यानी उन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ कर दिया।

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3,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बना रिजर्व जोन

गोडावण के अंडों और चूजों को सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग ने करीब 3,600 वर्ग किलोमीटर के मरुस्थलीय क्षेत्र को एकीकृत रिजर्व जोन के रूप में विकसित किया है। पूरे क्षेत्र को डॉग-फ्री जोन बनाया गया है, ताकि गोडावण के अंडों और चूजों पर कुत्तों से होने वाले खतरे को कम किया जा सके।

क्षेत्र में घास के मैदानों और जल स्रोतों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया गया है। इसका उद्देश्य भूमि के क्षरण को रोकने के साथ गोडावण के लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण तैयार करना है। विभाग के अनुसार, संरक्षित क्षेत्र विकसित किए जाने के बाद यहां चिंकारा की संख्या भी दस गुना बढ़ी है।

गोडावण को बताया थार की अंब्रेला प्रजाति

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने गोडावण को थार की जैव विविधता के लिए अंब्रेला प्रजाति बताया। इसका अर्थ है कि गोडावण के संरक्षण से उसके प्राकृतिक आवास में रहने वाली अन्य वन्यजीव प्रजातियों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को भी लाभ मिलेगा।

रामदेवरा में ईको टूरिज्म की संभावनाएं

रामदेवरा का यह क्षेत्र मध्य एशियाई पक्षी प्रवास मार्ग पर स्थित है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री ने इस क्षेत्र को भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की तर्ज पर बड़े ईको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावना जताई।

गोडावण संरक्षण के साथ यहां प्राकृतिक घास के मैदान, जल स्रोत और अन्य वन्यजीव भी संरक्षित होंगे। इससे क्षेत्र की जैव विविधता को बढ़ावा मिलने के साथ प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

आठ साल में परियोजना ने हासिल की बड़ी उपलब्धि

भूपेंद्र यादव ने कहा कि गोडावण संरक्षण की यह परियोजना दुनिया में कम समय में इस स्तर तक पहुंचने वाली परियोजनाओं में शामिल है। उनके अनुसार अफ्रीका, यूरोप और गुजरात में इस तरह के संरक्षण कार्यक्रमों को पूरा करने में 20 से 25 साल तक का समय लगा, जबकि राजस्थान में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और वन अधिकारियों ने करीब आठ साल में यह उपलब्धि हासिल की।

परियोजना को वर्ष 2018 में गति मिली, जब भारतीय वन्यजीव संस्थान और अंतरराष्ट्रीय हुबारा संरक्षण केंद्र के बीच समझौता हुआ। इसके बाद गोडावण के कृत्रिम संवर्धन और प्रजनन के साथ संरक्षण से जुड़े कार्यों को तेजी मिली।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के संकल्प को बताया अहम

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 2021 में जब वे बीकानेर से रामदेवरा पहुंचे थे, तब परियोजना की स्थिति गंभीर थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प, वैज्ञानिकों की मेहनत और अधिकारियों के आपसी समन्वय से यह काम आगे बढ़ सका।

वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि गोडावणों को उनके प्राकृतिक आवास में दोबारा बसाने की पहल से राजस्थान के राज्य पक्षी को उसका खोया गौरव और सम्मान वापस मिला है।

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