जामसर में करंट की चपेट में आए इंजीनियर की मौत, शटडाउन देने वालों पर लापरवाही का आरोप
जामसर। जामसर थाना क्षेत्र के कतरियासर जीएसएस में बिजली संबंधी कार्य के दौरान करंट की चपेट में आए 33 वर्षीय इंजीनियर की जयपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के पिता ने शटडाउन देने वाले कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में रिपोर्ट दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अजमेर निवासी मृतक के पिता राजेश त्रिपाठी ने रिपोर्ट में बताया कि उनका बेटा भूपेन्द्र त्रिपाठी STELMEL LTD. कंपनी में इंजीनियर था और वर्तमान में बीकानेर में पदस्थापित था। रिपोर्ट के अनुसार 10 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे भूपेन्द्र अन्य जीएसएस कर्मचारियों के साथ बिजली संबंधी कार्य के लिए कतरियासर जीएसएस गया था।
शटडाउन मिलने के बाद शुरू किया था काम
रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारियों ने फोन के जरिए शटडाउन देने वाले कर्मचारी से बिजली बंद करने के लिए कहा। संबंधित लाइनों में शटडाउन किए जाने की जानकारी मिलने के बाद भूपेन्द्र और अन्य कर्मचारियों ने काम शुरू किया। तीन पैनलों की सर्विस के बाद जब चौथे पैनल पर काम शुरू किया गया, तभी भूपेन्द्र करंट की चपेट में आ गया।
हादसे में उसका बायां हाथ बुरी तरह झुलस गया। इसके अलावा चेहरे, दाहिने हाथ, गर्दन और छाती सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर भी गंभीर झुलसने की चोटें आईं। घटना के बाद उसे इलाज के लिए जयपुर ले जाया गया, जहां संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आईसीयू में इलाज के दौरान मौत
मृतक के पिता के अनुसार अस्पताल में भर्ती कराए जाने के समय भूपेन्द्र होश में था और उसने घटना के संबंध में जानकारी दी थी। बाद में हालत गंभीर होने पर वह अचेत हो गया। उसे अस्पताल के आईसीयू में भर्ती रखा गया, जहां 22 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
शटडाउन प्रक्रिया की जांच कर रही पुलिस
भूपेन्द्र की मौत के बाद उसके पिता ने 23 सितंबर को जयपुर में रिपोर्ट पेश कर आरोप लगाया कि हादसा शटडाउन देने वाले कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हुआ। उन्होंने STELMEL LTD. और संबंधित जीएसएस कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्ट के आधार पर जामसर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। जांच कार्यवाहक थानाधिकारी रामकेश को सौंपी गई है। पुलिस हादसे के कारणों, शटडाउन की प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस जांच के बाद ही हादसे में लापरवाही और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।






