नोखा। नोखा के बाबा छोटूनाथ नगर कॉलोनी में दो प्लॉट खरीदने के लिए 17 लाख रुपए लेने के बाद एक प्लॉट की रजिस्ट्री कराने और दूसरे प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं कराने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश के बाद नोखा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला सोमवार रात दर्ज हुआ। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
मामले में टांट निवासी बदनकंवर ने न्यायालय में इस्तगासा पेश किया था। इसमें कॉलोनी मालिक जगदीश बागड़ी और उसके मुनीम सिकेन्द्र अली के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। मामले की जांच एएसआई हरिराम मीणा कर रहे हैं।
दो प्लॉट का 17 लाख रुपए में हुआ सौदा
परिवाद के अनुसार, बदनकंवर ने 15 मई 2025 को बाबा छोटूनाथ नगर कॉलोनी में प्लॉट नंबर 161 और 162 खरीदने का सौदा किया था। दोनों प्लॉट के लिए कुल 17 लाख रुपए साई पेटे देने की बात तय हुई थी।
आरोप है कि कॉलोनी मालिक जगदीश बागड़ी के कहने पर बदनकंवर ने उसके मुनीम सिकेन्द्र अली से संपर्क किया। इसके बाद सिकेन्द्र अली के भाई साजिद अली को 17 लाख रुपए नकद दिए गए। परिवादिनी के अनुसार, रकम लेने की रसीद भी दी गई थी।
एक प्लॉट की रजिस्ट्री हुई, दूसरा रह गया
परिवाद के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2025 को प्लॉट नंबर 161 की रजिस्ट्री बदनकंवर के नाम करा दी गई। रजिस्ट्री के दौरान मालियत के 2.58 लाख रुपए का चेक जगदीश बागड़ी को दिए जाने की बात कही गई है।
इसके बाद जब प्लॉट नंबर 162 की रजिस्ट्री कराने के लिए कहा गया तो बाद में रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया गया। आरोप है कि दिसंबर 2025 में रजिस्ट्री के लिए संपर्क करने पर सिकेन्द्र अली टालमटोल करते रहे। जगदीश बागड़ी से संपर्क करने के बावजूद भी दूसरे प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
रजिस्ट्री मांगने पर धमकी देने का आरोप
परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि 5 दिसंबर 2025 को सिकेन्द्र अली ने बदनकंवर को कथित रूप से धमकी दी। महिला ने अपने परिवाद में पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
थाने से कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट पहुंची महिला
बदनकंवर के अनुसार, मामले को लेकर पहले नोखा थाने में शिकायत दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक बीकानेर को भी लिखित शिकायत दी। इसके बाद न्यायालय में धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत परिवाद पेश किया गया।
कोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज
न्यायालय के आदेश के बाद नोखा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब परिवाद में लगाए गए आरोपों, 17 लाख रुपए के भुगतान, रसीद, प्लॉट की रजिस्ट्री और दोनों पक्षों के बीच हुए दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और दूसरे प्लॉट की रजिस्ट्री क्यों नहीं कराई गई।





