नामांकन के पहले दिन सन्नाटा! टिकट नहीं मिले तो मैदान में उतरेंगे निर्दलीय?

28 Aug 2026 BIKANER
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बीकानेर। नगरीय निकाय चुनाव की लोकसूचना जारी होने के साथ ही बीकानेर नगर निगम सहित पांच नगर पालिकाओं के वार्डों में नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनावी माहौल बनने के बावजूद नामांकन के पहले दिन केंद्रों पर अपेक्षित हलचल दिखाई नहीं दी। सुबह 10:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी अपने-अपने नामांकन केंद्रों पर मौजूद रहे, लेकिन नामांकन दाखिल करने वालों की संख्या बेहद कम रही।

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टिकट का इंतजार, इसलिए नहीं पहुंचे दावेदार

नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई दावेदार नामांकन पत्र लेने और चुनावी प्रक्रिया की जानकारी लेने जरूर पहुंचे, लेकिन बड़ी संख्या में प्रत्याशियों ने पर्चे दाखिल नहीं किए। इसकी प्रमुख वजह भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े राजनीतिक दलों द्वारा अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं किया जाना माना जा रहा है।

नगर निगम के अधिकांश वार्डों में टिकट के लिए कई नेता और स्थानीय कार्यकर्ता दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में दावेदारों की नजर फिलहाल पार्टी की अंतिम सूची पर टिकी हुई है। पार्टी टिकट मिलने के बाद ही अधिकांश नेता अपना अगला राजनीतिक कदम तय करना चाहते हैं।

अब बचे हैं सिर्फ दो प्रमुख दिन

नामांकन प्रक्रिया के बीच 28 अगस्त को रक्षाबंधन का अवकाश रहेगा। इसके बाद उम्मीदवारों के पास नामांकन दाखिल करने के लिए 29 और 31 अगस्त के दो प्रमुख दिन बचेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि टिकटों की घोषणा होते ही नामांकन केंद्रों पर अचानक भीड़ बढ़ सकती है।

बीकानेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं और नामांकन प्रक्रिया के लिए पांच केंद्र बनाए गए हैं। भाजपा और कांग्रेस द्वारा प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद पार्टी उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल करेंगे। वहीं टिकट से वंचित रहने वाले दावेदारों के अगले कदम पर भी सभी की नजर रहेगी।

टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय बनेंगे चुनौती?

चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा टिकट वितरण के बाद शुरू हो सकता है। कई वार्डों में ऐसे मजबूत स्थानीय दावेदार हैं, जिन्हें यदि पार्टी टिकट नहीं देती है तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर सकते हैं।

ऐसी स्थिति में चुनावी मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं रहेगा। टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाला मजबूत उम्मीदवार पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के वोटों में सेंध लगा सकता है और चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

2019 के आंकड़े बढ़ाते हैं पार्टियों की चिंता

वर्ष 2019 के बीकानेर नगर निगम चुनाव के आंकड़े निर्दलीय उम्मीदवारों की राजनीतिक ताकत को दर्शाते हैं। उस समय नगर निगम के कुल 80 वार्डों में भाजपा ने 79 और कांग्रेस ने भी 79 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। इसके मुकाबले करीब 164 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।

निर्दलीय उम्मीदवारों को कुल वोटों का लगभग 26.46 प्रतिशत हिस्सा मिला था। वहीं भाजपा को करीब 34.99 प्रतिशत और कांग्रेस को लगभग 36.07 प्रतिशत वोट मिले थे। निर्दलीयों का वोट शेयर दोनों प्रमुख दलों से कम जरूर था, लेकिन 26 प्रतिशत से अधिक वोट किसी भी चुनाव में छोटा आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

खासतौर पर उन वार्डों में जहां जीत और हार का अंतर कम होता है, वहां निर्दलीय उम्मीदवार पूरे चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि इस बार टिकट वितरण के बाद संभावित बगावत राजनीतिक दलों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

भाजपा ने शुरू किया डेमेज कंट्रोल?

टिकट वितरण के बाद पार्टी में असंतोष और संभावित बगावत को रोकने के लिए भाजपा द्वारा पहले से डेमेज कंट्रोल की कोशिश किए जाने की भी राजनीतिक चर्चाएं हैं। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच ने शिव पार्वती भवन में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं से पार्टी उम्मीदवार के साथ मजबूती से खड़े रहने की अपील की।

सम्मेलन के दौरान मां करणी की कसम दिलाए जाने से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा। राजनीतिक हलकों में इसे टिकट वितरण के बाद संभावित नाराजगी को नियंत्रित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से इसका उद्देश्य संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना बताया जा सकता है।

टिकट सूची के बाद बदलेगा पूरा चुनावी माहौल

फिलहाल बीकानेर की राजनीति में सबसे बड़ी प्रतीक्षा भाजपा और कांग्रेस की टिकट सूची को लेकर है। जैसे ही दोनों दल अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करेंगे, नामांकन केंद्रों पर गतिविधियां तेज होने की संभावना है। इसके साथ ही यह भी साफ होने लगेगा कि कौन पार्टी के साथ रहेगा और कौन टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला करता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—टिकट वितरण के बाद कितने दावेदार बगावत करेंगे और कितने वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा और कांग्रेस के चुनावी समीकरण बिगाड़ेंगे?

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