बीकानेर। राजस्थान में टाउनशिप पॉलिसी के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। सरकार ने कृषि भूमि पर एकल पट्टा जारी करने की न्यूनतम सीमा को 750 वर्गमीटर से घटाकर 500 वर्गमीटर करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है। प्रस्ताव लागू होने के बाद 500 से 749 वर्गमीटर तक की कृषि भूमि वाले भू-स्वामियों के लिए भी एकल पट्टा लेने का रास्ता खुल सकता है।
इसके साथ ही जमीन के सब-डिवीजन यानी उपविभाजन के नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित है। मौजूदा व्यवस्था में एक भूखंड के उपविभाजन के बाद अधिकतम चार भूखंड बनाए जा सकते हैं। अब इस सीमा को बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि, उपविभाजन के बाद बनने वाले प्रत्येक भूखंड का क्षेत्रफल कम से कम 500 वर्गमीटर रखना प्रस्तावित है।
750 की जगह 500 वर्गमीटर में एकल पट्टे का रास्ता
राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी-2024 में कृषि भूमि पर 750 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल के भूखंड के लिए एकल पट्टा जारी नहीं करने का प्रावधान है। अब सरकार इसमें बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक न्यूनतम सीमा 500 वर्गमीटर की जा सकती है।
इस बदलाव से ऐसे भू-स्वामियों को राहत मिल सकती है, जिनके पास पारिवारिक बंटवारे या अन्य कारणों से 500 से 749 वर्गमीटर तक जमीन रह गई है। एकल पट्टा मिलने से जमीन के वैध उपयोग और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन में सुविधा मिल सकती है।
सब-डिवीजन में चार से ज्यादा भूखंड बनाने की तैयारी
टाउनशिप पॉलिसी में भूखंड के सब-डिवीजन को लेकर भी बदलाव प्रस्तावित है। मौजूदा सीमा में एक भूखंड के उपविभाजन के बाद अधिकतम चार भूखंड बनाए जा सकते हैं। प्रस्तावित बदलाव के बाद बड़े भूखंडों को चार से अधिक हिस्सों में बांटने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, इसके लिए बनने वाले प्रत्येक नए भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर रखना प्रस्तावित है। इससे छोटे आकार के भूखंडों की उपलब्धता बढ़ सकती है और बड़े भूखंडों का उपयोग अधिक हिस्सों में किया जा सकेगा।
एचटी लाइन के नीचे दूरी घटाने का प्रस्ताव
टाउनशिप पॉलिसी में हाईटेंशन लाइन से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव की तैयारी है। इसके तहत निर्धारित 12 मीटर की दूरी को घटाकर 9 मीटर करने का प्रस्ताव बताया गया है। हालांकि, हाईटेंशन लाइनों के आसपास निर्माण और सुरक्षा से जुड़े अन्य नियमों की पालना जरूरी रहेगी।
मौजूदा टाउनशिप पॉलिसी में 132 केवी और उससे अधिक की हाईटेंशन लाइन के लिए अलग-अलग सुरक्षा कॉरिडोर निर्धारित हैं और सुरक्षा क्षेत्र में निर्माण की अनुमति नहीं है।
बड़े भू-स्वामियों और रियल एस्टेट सेक्टर पर असर
प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर छोटे भू-स्वामियों को जमीन के उपयोग में राहत मिल सकती है। वहीं सब-डिवीजन की सीमा बढ़ने से बड़े भूखंडों को अधिक हिस्सों में बांटकर उपयोग करना आसान हो सकता है। इससे छोटे प्लॉट की उपलब्धता भी बढ़ सकती है।
हालांकि, छोटे भूखंडों की संख्या बढ़ने के साथ किसी क्षेत्र में आबादी और निर्माण घनत्व बढ़ने की संभावना रहेगी। ऐसे में सड़क, पानी, बिजली, सीवरेज, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
अभी प्रस्ताव, मंजूरी के बाद लागू होंगे बदलाव
महत्वपूर्ण बात यह है कि 500 वर्गमीटर की सीमा, सब-डिवीजन की बढ़ी हुई सीमा और एचटी लाइन से जुड़ा प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद ही नए नियम के रूप में प्रभावी होगा। नगरीय विकास एवं आवासन विभाग की मंजूरी और संबंधित आदेश जारी होने के बाद ही इसकी अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
राजस्थान सरकार के नगरीय विकास एवं आवासन विभाग ने जून 2026 में राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी-2024 के विभिन्न प्रावधानों के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों और हितधारकों से मिले सुझावों के आधार पर स्पष्टीकरण भी जारी किया था।







