गुमशुदगी की जांच में रिश्वत मांगने का आरोप, तत्कालीन हेड कांस्टेबल के खिलाफ एसीबी ने पेश किया चालान

01 Nov 2026 BIKANER
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गुमशुदगी केस में रिश्वत मांगने का आरोप, हेड कांस्टेबल के खिलाफ चालान

गुमशुदगी की जांच में रिश्वत मांगने का आरोप, तत्कालीन हेड कांस्टेबल के खिलाफ एसीबी ने पेश किया चालान

गुमशुदगी के एक मामले की जांच के दौरान रिश्वत मांगने और कथित रूप से अवैध रूप से थाने में रखे गए सामान को लौटाने के बदले रकम वसूलने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने तत्कालीन हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार मीणा के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया है। आरोपी पर शिकायतकर्ता की पत्नी की चांदी की पायल और 30 हजार रुपए रिश्वत के रूप में मांगने का आरोप है। जिला पुलिस अधीक्षक से अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद एसीबी ने अदालत में चालान पेश किया।

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गुमशुदगी की रिपोर्ट से शुरू हुआ मामला

मामले की शुरुआत गुमशुदगी की एक रिपोर्ट से हुई थी। शिकायतकर्ता कान सिंह की पत्नी एक युवती के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। इस मामले की जांच तत्कालीन हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार मीणा के पास थी। आरोप है कि जांच के दौरान हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता के भाई का मोबाइल फोन और उसकी बहन के नाम पर पंजीकृत बाइक थाने में रख ली। इन सामानों की जब्ती का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं किया गया।

शिकायत के अनुसार, सामान वापस करने के बदले 30 हजार रुपए और युवती की चांदी की पायल देने का दबाव बनाया गया।

शिकायत के सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि

शिकायतकर्ता ने 26 जुलाई 2025 को एसीबी की बीकानेर चौकी में शिकायत दर्ज कराई। एसीबी निरीक्षक आनंद मिश्रा के नेतृत्व में 26 और 28 जुलाई को शिकायत का सत्यापन किया गया। एसीबी के अनुसार, सत्यापन के दौरान आरोपी द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई।

बातचीत की रिकॉर्डिंग में आरोपी शिकायतकर्ता से कहता सुनाई दिया कि बाइक का चालान 10 हजार रुपए का हो गया है और उसे पेंडिंग करवाने के लिए पैसे देने होंगे। शिकायतकर्ता ने जेब में 3,500 रुपए होने की बात कही तो आरोपी ने कथित तौर पर 3 हजार रुपए रिश्वत के रूप में स्वीकार कर लिए। बाकी रकम और पायल नहीं मिलने के कारण मोबाइल फोन वापस नहीं लौटाने का आरोप है।

दूसरे मोबाइल से शिकायतकर्ता को किया कॉल

आरोप है कि हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता को बार-बार फोन कर बाकी रकम देने के लिए दबाव बनाया। 28 जुलाई को उसने अपना सरकारी मोबाइल फोन बंद कर लिया और थाने के सामने चाय की दुकान चलाने वाले जगदीश जांगिड़ के मोबाइल से शिकायतकर्ता को कॉल किया।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने जगदीश के जीजा स्वरूप सिंह को फोन कर आरोपी के बारे में जानकारी दी। स्वरूप सिंह ने आरोपी को फोन भेजकर थाने बुलाने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी ने फोन पर बातचीत करने से इनकार कर दिया।

कॉल का तकनीकी विश्लेषण और आवाज का नमूना

एसीबी ने मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए आरोपी के निजी मोबाइल नंबर, शिकायतकर्ता, जगदीश जांगिड़ और शिकायतकर्ता के जीजा के बीच हुई कॉल का तकनीकी विश्लेषण कराया। इसके अलावा आरोपी की आवाज का नमूना लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।

अदालत में आवाज का नमूना लेने की बात आने पर आरोपी ने वॉइस सैंपल देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अदालत ने इस तथ्य को केस डायरी में दर्ज किया। सीलबंद डीवीआर, मूल मेमोरी कार्ड और पेनड्राइव एफएसएल जयपुर भेजे गए।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में चालान

जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर एसीबी ने आरोपी सुरेश कुमार मीणा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत न्यायालय में चालान पेश किया है। आरोपी पर रिश्वत मांगने के आरोप हैं; मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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