दीपावली पर जुए की शिकायतें, बीकानेर में Gen-Z के भविष्य को लेकर चिंता

05 Nov 2026 BIKANER
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दीपावली पर जुए की शिकायतें, बीकानेर में Gen-Z के भविष्य को लेकर चिंता | Aapni Awaj

दीपावली पर जुए की शिकायतें, बीकानेर में Gen-Z के भविष्य को लेकर चिंता

बीकानेर | Aapni Awaj

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दीपावली खुशियों, रोशनी और आपसी भाईचारे का त्योहार है, लेकिन बीकानेर में त्योहार के दौरान जुए की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई जा रही है। शहर के कई चौक-चौराहों और गलियों में परम्परा के नाम पर जुआ खेले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। चिंता की बात यह है कि इस माहौल में नई पीढ़ी यानी Gen-Z के युवाओं के भी आकर्षित होने की आशंका जताई जा रही है।

नत्थूसर गेट के अंदर और शहर के अन्य इलाकों में दीपावली के दिनों में जुए के खेल की गतिविधियां शुरू होने की चर्चाएं हैं। इस मुद्दे को लेकर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास कुछ दिन पहले ही पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि त्योहार मनाने के नाम पर जुए को सामाजिक परम्परा का रूप देना कितना उचित है।

परम्परा के नाम पर युवाओं के भटकने की चिंता

दीपावली का उत्सव परिवारों को जोड़ने और खुशियां बांटने का माध्यम रहा है। लेकिन जुए को परम्परा बताकर सामान्य गतिविधि के रूप में स्वीकार करने की प्रवृत्ति चिंता बढ़ा रही है। दोस्तों के बीच मनोरंजन के तौर पर छोटी रकम लगाने से शुरू होने वाला यह शौक कब आदत या लत में बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।

मोबाइल गेमिंग, ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी जैसे आकर्षणों के बीच यदि गलियों और चौक-चौराहों में भी जुए का माहौल बनता है, तो इसका असर युवाओं की सोच, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है।

जुए और सट्टेबाजी से आर्थिक जोखिम का खतरा

युवाओं में जुए, सट्टेबाजी और नशे की ओर बढ़ते रुझान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। जल्दी पैसा कमाने की चाह युवाओं को गलत संगत और आर्थिक जोखिमों की ओर धकेल सकती है। कर्ज, पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव जैसी समस्याएं भी ऐसी आदतों के संभावित परिणाम हो सकती हैं।

मेहनत और हुनर के बजाय किस्मत के सहारे कमाई की उम्मीद युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में अभिभावकों और समाज के जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

जुए की शिकायतों पर पुलिस की निगरानी को लेकर सवाल

यदि शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और गलियों में जुए की गतिविधियों की शिकायतें मिल रही हैं, तो पुलिस की निगरानी और गश्त पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय स्तर पर यह मांग की जा रही है कि पुलिस संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाए और शिकायतों की निष्पक्ष जांच करे।

पुलिस प्रशासन से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि वह केवल शिकायतों का इंतजार न करे, बल्कि त्योहार के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाए। हालांकि, जुए की गतिविधियों और उनके विस्तार को लेकर सामने आ रही बातों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।

रोशनी के त्योहार में अंधेरे की ओर बढ़ते कदम

बीकानेर की पहचान उसकी संस्कृति, परम्पराओं और सामाजिक सौहार्द से है। ऐसे में जरूरी है कि परम्परा और गलत गतिविधियों के बीच अंतर समझा जाए। दीपावली पर खुशियां बांटने की परम्परा को जुए की आड़ में प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।

अभिभावकों, समाज के जिम्मेदार लोगों, जनप्रतिनिधियों और पुलिस प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना होगा। मुद्दा केवल जुए का नहीं, बल्कि उस युवा पीढ़ी के भविष्य का भी है जिसके हाथों में शहर की आने वाली दिशा है।

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