2022 में बेची जमीन फिर 2026 में बेच दी! बीकानेर में जमीन सौदे को लेकर मचा हड़कंप
बीकानेर। बींछवाल थाना क्षेत्र के किसमीदेसर में कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने जमीन के सौदे और दस्तावेजों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों मामलों में आरोप है कि पहले जमीन का विक्रय एक व्यक्ति के पक्ष में किया गया और बाद में उसी जमीन को दूसरे व्यक्ति के पक्ष में बेच दिया गया। मामलों में धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर दोनों मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहले मामले में एक ही जमीन दो बार बेचने का आरोप
पहले मामले में लालचंद गहलोत पुत्र जतनलाल गहलोत, निवासी शिव मंदिर के पीछे किसमीदेसर ने न्यायालय में इस्तगासा पेश किया। परिवादी के अनुसार किसमीदेसर स्थित कृषि भूमि में मीना देवी के 1/14 हिस्से की जमीन का पंजीकृत विक्रय पत्र 25 अप्रैल 2022 को उसके पक्ष में कराया गया था। यह विक्रय मीना देवी के अधिकृत मुख्त्यारआम हरीशचंद्र के माध्यम से किया गया था।
परिवादी का कहना है कि उसने जमीन की पूरी राशि अदा कर दी थी और विक्रय के बाद उसे जमीन का कब्जा भी सौंप दिया गया था। इसके बाद से वह जमीन पर खेती करता आ रहा था।
2026 में सामने आया दोबारा बिक्री का मामला
लालचंद के अनुसार 25 मई 2026 को वह अपनी खरीदी हुई जमीन पर मौजूद था। इसी दौरान नरपत सिंह वहां पहुंचा और दावा किया कि उसने यही जमीन 31 मार्च 2026 को मीना देवी से खरीदी है। इस पर लालचंद ने उसे बताया कि वह जमीन वर्ष 2022 में ही खरीद चुका है और जमीन को दोबारा बेचने का अधिकार मीना देवी के पास नहीं था।
परिवादी ने आरोप लगाया कि जब उसने मीना देवी से इस संबंध में जानकारी ली तो उसने कथित तौर पर रुपये हड़पने के उद्देश्य से उसी जमीन को दोबारा नरपत सिंह के पक्ष में बेचने की बात स्वीकार की। परिवादी का आरोप है कि मीना देवी को पहले से पता था कि जमीन वर्ष 2022 में बेची जा चुकी है और उसका पूरा भुगतान तथा कब्जा भी दिया जा चुका था।
मामले में मीना देवी, नरपत सिंह, विक्रय पत्र के गवाह समुन्द्र सिंह और घनश्याम को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अनुसंधान बींछवाल थानाधिकारी दिगपाल सिंह कर रहे हैं।
दूसरे मामले में भी जमीन दोबारा बेचने का आरोप
इसी तरह के आरोपों वाला एक अन्य मामला छगनलाल गहलोत पुत्र नेमाराम गहलोत की शिकायत पर दर्ज हुआ है। छगनलाल ने भी किसमीदेसर की कृषि भूमि को लेकर आरोप लगाया कि संबंधित भूमि में मोहनी के हिस्से का विक्रय 25 अप्रैल 2022 को उसके पक्ष में किया गया था। परिवादी के अनुसार उसने जमीन की पूरी राशि अदा कर कब्जा भी प्राप्त कर लिया था।
छगनलाल का आरोप है कि 25 मई 2026 को नरपत सिंह मौके पर पहुंचा और उसने दावा किया कि उसने भी यही जमीन 31 मार्च 2026 को मोहनी से खरीद ली है। इसके बाद छगनलाल ने मोहनी से संपर्क किया तो कथित रूप से उसने जमीन दोबारा बेचने की बात स्वीकार की।
इस मामले में मोहनी, नरपत सिंह, सुरेश तंवर और घनश्याम को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दोनों मामलों में सामने आए नरपत सिंह और घनश्याम के नाम
दोनों मामलों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों में नरपत सिंह और घनश्याम के नाम सामने आए हैं। दोनों मामलों में आरोप है कि पहले से बेची जा चुकी कृषि भूमि का बाद में दोबारा विक्रय किया गया और इसके लिए संबंधित दस्तावेज तैयार कराए गए।
पुलिस खंगालेगी जमीन के दस्तावेज और रिकॉर्ड
पुलिस अब दोनों मामलों में विक्रय पत्रों, भूमि के राजस्व रिकॉर्ड, भुगतान, कब्जे और उप-पंजीयक कार्यालय में दर्ज दस्तावेजों की जांच करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित भूमि का वास्तविक स्वामित्व और विक्रय अधिकार किसके पास था तथा एक ही भूमि के अलग-अलग लोगों के पक्ष में विक्रय पत्र किन परिस्थितियों में पंजीकृत हुए।
फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है। जांच के बाद ही जमीन के कथित दोहरे विक्रय और दस्तावेजों से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




