बीकानेर मेडिकल कॉलेज में परीक्षा तनाव और आत्महत्या रोकथाम पर जागरूकता

06 Oct 2026 BIKANER
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बीकानेर। मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग, पीबीएम अस्पताल तथा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम इकाई, बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में मानसिक स्वास्थ्य माह एवं विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के तीसरे दिन मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में परीक्षा तनाव प्रबंधन, आत्महत्या रोकथाम और नशा मुक्ति जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।

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मानसिक स्वास्थ्य को लेकर झिझक दूर करने पर जोर

कार्यक्रम की शुरुआत मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र कुमार तथा मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीगोपाल गोयल के परिचयात्मक संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विद्यार्थियों को मानसिक समस्याओं को लेकर झिझक या संकोच करने की बजाय जरूरत पड़ने पर समय रहते विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए।

इस दौरान डॉ. सुरेंद्र कुमार और डॉ. श्रीगोपाल गोयल ने विद्यार्थियों एवं स्टाफ को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और नशा मुक्ति के प्रति सजग रहने तथा समाज में सकारात्मक संदेशों का प्रसार करने की शपथ दिलाई।

विद्यार्थियों को QPR मॉडल की जानकारी

प्रथम वर्ष के मेडिकल विद्यार्थियों के लिए परीक्षा तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। डॉ. अनामिका ने विद्यार्थियों को QPR यानी Question, Persuade, Refer मॉडल तथा “I Support My Friend” मॉड्यूल की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन लगातार बढ़ता तनाव मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। विद्यार्थियों को तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने, स्वस्थ दिनचर्या अपनाने, समय प्रबंधन करने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।

आत्महत्या के चेतावनी संकेत पहचानने की जानकारी

डॉ. अनामिका ने विद्यार्थियों को अपने मित्रों और सहपाठियों में मानसिक परेशानी या आत्महत्या से जुड़े चेतावनी संकेत पहचानने, संवेदनशीलता के साथ संवाद करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेषज्ञ सहायता तक पहुंचाने के महत्व के बारे में बताया।

नशे के दुष्प्रभाव और उपचार की जानकारी

डॉ. महिपाल ने आत्महत्या रोकथाम एवं नशे के दुष्प्रभावों पर जागरूकता व्याख्यान दिया। उन्होंने आत्महत्या के संभावित जोखिम कारकों और चेतावनी संकेतों की जानकारी देते हुए कहा कि संकट की स्थिति में समय पर पहचान, संवाद और सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने विभिन्न नशीले पदार्थों से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान के साथ-साथ नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए उपलब्ध उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं की जानकारी भी साझा की।

आगे भी होंगे जागरूकता कार्यक्रम

कार्यक्रम का उद्देश्य मेडिकल विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना, परीक्षा तनाव के स्वस्थ एवं प्रभावी प्रबंधन के तरीके बताना, आत्महत्या के चेतावनी संकेतों की समय पर पहचान और रोकथाम के प्रति जागरूक करना तथा नशे से बचाव और उपचार से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध कराना रहा।

मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग की ओर से बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य माह एवं विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के आगामी दिनों में भी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, नशा मुक्ति, आत्महत्या रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता विनोद पंचारिया और रविन्द्र भाटी का विशेष सहयोग रहा।

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