सोशल मीडिया पर पार्षद बनने की होड़! बीकानेर में चुनाव से पहले सियासी खेल

11 Aug 2026 BIKANER
Advertisement

बीकानेर। जैसे-जैसे निकाय चुनावों की आहट सुनाई देने लगी है, वैसे-वैसे शहर की राजनीति भी करवट लेने लगी है। राजनीति में रुचि रखने वाले लोग अचानक सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। कहीं बैठकें शुरू हो गई हैं, कहीं नेताओं के दरबार में हाजिरी बढ़ गई है और कहीं सोशल मीडिया पर अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने की होड़ शुरू हो गई है।

आज के दौर में राजनीति में अपनी दावेदारी जताने का सबसे आसान और सस्ता माध्यम सोशल मीडिया बन गया है। किसी कार्यक्रम में पहुंचिए, नेता के साथ फोटो खिंचवाइए और फिर उसे फेसबुक या इंस्टाग्राम पर इस तरह पोस्ट कीजिए, जैसे वार्ड की जनता ने आपको अपना अगला पार्षद चुन ही लिया हो।

बीकानेर में कुल 80 वार्ड हैं, लेकिन पार्षद बनने के दावेदारों की संख्या शायद इसकी कई गुना नजर आ रही है। अभी चुनाव घोषित भी नहीं हुए हैं और सोशल मीडिया पर संभावित पार्षदों की सक्रियता बढ़ गई है। हर दूसरा व्यक्ति खुद को पार्टी का सबसे सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता साबित करने में जुटा हुआ है।

चुनाव से पहले ही शुरू हो जाता है टिकट का खेल

दिलचस्प बात यह है कि इस राजनीतिक कहानी की शुरुआत चुनाव से काफी पहले हो जाती है। विधानसभा चुनावों के दौरान कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाया जाता है कि पार्टी के लिए मेहनत करो, आगे निकाय चुनाव आएंगे तो तुम्हारे नाम पर विचार किया जाएगा और पार्टी का सिंबल मिल सकता है। लेकिन परेशानी यह है कि एक ही वार्ड में ऐसे भरोसे कई लोगों को मिल जाते हैं।

अब जैसे-जैसे निकाय चुनाव नजदीक आएंगे, टिकट की असली जंग शुरू होगी। जिसे टिकट का भरोसा मिला था, वह टिकट मांगेगा। जिसे कोई स्पष्ट भरोसा नहीं मिला, वह भी खुद को मजबूत दावेदार बताएगा। वहीं जिसे टिकट मिलने की संभावना कम नजर आएगी, वह भी आखिरी समय तक अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।

सोशल मीडिया पर कौन कितना सक्रिय?

फिलहाल सोशल मीडिया पर यही मुकाबला दिखाई दे रहा है कि कौन कितना सक्रिय है, किसकी नेताओं के साथ कितनी तस्वीरें हैं, किसने कितने राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और किसके पोस्ट पर कितने कमेंट और लाइक आ रहे हैं। लेकिन असली सवाल सोशल मीडिया की सक्रियता का नहीं, बल्कि पार्टी टिकट का है।

80 वार्ड और सैकड़ों दावेदारों के बीच राजनीतिक दलों के सामने भी बड़ी चुनौती होगी। एक व्यक्ति को टिकट मिलेगा तो बाकी दावेदारों को समझाना पड़ेगा। ऐसे में टिकट से वंचित कई दावेदार बगावत या निर्दलीय चुनाव का रास्ता भी अपना सकते हैं। कुछ लोग पार्टी से नाराज होकर अगले चुनाव तक दूरी बनाए रख सकते हैं।

पार्टी की सूची आने के बाद साफ होगी तस्वीर

फिलहाल बीकानेर में सोशल मीडिया पर संभावित दावेदारों की बाढ़ दिखाई दे रही है। लेकिन असली राजनीतिक तस्वीर तब सामने आएगी, जब पार्टियां अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेंगी और सैकड़ों दावेदारों में से चुनिंदा नामों पर पार्टी की मुहर लगेगी।

इसके बाद ही पता चलेगा कि सोशल मीडिया की सक्रियता कितनी काम आई और जमीन पर किसकी राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत थी। फिलहाल निकाय चुनाव की घोषणा से पहले ही बीकानेर की सियासत में टिकट की दौड़ ने माहौल गरमा दिया है।

Share: