AAPNI AWAJ | बीकानेर
दीपावली पर चार शुभ योगों का संयोग: 8 नवंबर को होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन, धनतेरस से भाई दूज तक रहेगी दीपोत्सव की रौनक
बीकानेर। रोशनी, उल्लास और सुख-समृद्धि का महापर्व दीपावली इस बार चार शुभ योगों के संयोग में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। दीपावली 8 नवंबर, रविवार को कार्तिक अमावस्या और स्वाति नक्षत्र के संयोग में आएगी। इस अवसर पर बुधादित्य राजयोग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और लक्ष्मी नारायण योग का विशेष संयोग रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. राजेन्द्र किराडू के अनुसार इन शुभ योगों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। धनतेरस से भाई दूज तक पांच प्रमुख पर्वों के साथ दीपोत्सव की रौनक देखने को मिलेगी। पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि की जयंती भी मनाई जाएगी। धन, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी।
चार शुभ योगों में होगा लक्ष्मी-गणेश पूजन
पं. किराडू के अनुसार इस बार दीपावली पर चार प्रमुख शुभ योग बन रहे हैं। सूर्य और बुध की तुला राशि में युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह योग बुद्धि, करियर, व्यापार और आर्थिक उन्नति के लिए शुभ माना जाता है।
आयुष्मान योग 8 नवंबर को सुबह 3:28 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को सुबह 3:03 बजे तक रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग का संयोग रहेगा। वहीं शुक्र और बुध की तुला राशि में युति से लक्ष्मी नारायण योग बनेगा, जिसका प्रभाव पूरे नवंबर माह रहेगा। इसे धन, वैभव और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
दीपावली पर तिथि और शुभ मुहूर्त
8 नवंबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन स्वाति नक्षत्र रहेगा। सुबह से लेकर रात्रि तक विभिन्न चौघड़िया और लग्न के अनुसार पूजन के शुभ मुहूर्त रहेंगे।
दिन के पूजन मुहूर्त
- सुबह 8 बजे से 9:25 बजे तक – चंचल बेला और वृश्चिक लग्न।
- सुबह 9:25 बजे से 10:47 बजे तक – लाभ का चौघड़िया।
- सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक – अमृत बेला एवं अभिजीत बेला।
- दोपहर 1:35 बजे से 3:15 बजे तक – शुभ का चौघड़िया।
रात्रिकालीन पूजन मुहूर्त
- शाम 4:40 बजे से 6:15 बजे तक – गोधूलि लग्न।
- शाम 5:45 बजे से 7:21 बजे तक – शुभ का चौघड़िया।
- शाम 6:15 बजे से रात 8:13 बजे तक – वृषभ लग्न।
- शाम 7:21 बजे से रात 9 बजे तक – अमृत बेला।
- रात 8:13 बजे से 10:35 बजे तक – मिथुन लग्न और चंचल बेला।
- रात 12:45 बजे से सुबह 3 बजे तक – सिंह लग्न का मुहूर्त।
धनतेरस से भाई दूज तक पांच महापर्वों की तिथियां
6 नवंबर, शुक्रवार – धनतेरस
धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विधान है। प्रदोष काल शाम 5:47 बजे से रात 8:30 बजे तक रहेगा। वृषभ लग्न शाम 6:18 बजे से रात 8:15 बजे तक रहेगा। चौघड़िया लाभ बेला रात 9:03 बजे से 10:41 बजे तक रहेगी। यम दीपदान का समय सुबह 10:31 बजे से बताया गया है। धन्वंतरि जयंती पर दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अभिजीत, गोधूलि और प्रदोष काल में भी शुभ कार्य किए जा सकेंगे।
7 नवंबर, शनिवार – रूप चौदस
इस दिन नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली मनाई जाएगी। इसे रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन अभ्यंग स्नान और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है।
8 नवंबर, रविवार – दीपावली
इस दिन मुख्य दीपावली पर्व मनाया जाएगा। घरों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश का पूजन, दीपदान और दीपमाला की परंपरा निभाई जाएगी। शाम को दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।
10 नवंबर, मंगलवार – गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है। मान्यता है कि दीपावली की रात जलाया गया अखंड घी का दीपक गोवर्धन पूजा तक प्रज्वलित रखा जाता है।
11 नवंबर, बुधवार – भाई दूज
भाई-बहन के स्नेह और मंगलकामना का प्रतीक भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करेंगी।
20 नवंबर को देवप्रबोधिनी एकादशी
कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवप्रबोधिनी एकादशी मनाई जाएगी। स्मार्त मतानुसार एकादशी तिथि सुबह 7:15 बजे से रहेगी, जबकि वैष्णव संप्रदाय के अनुसार यह पर्व 21 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास का समापन और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।
24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा
24 नवंबर, मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी। कार्तिक मास का समापन कार्तिक पूर्णिमा के साथ होगा। इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान, दान, दीपदान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व रहेगा। मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
नोट: पूजा के मुहूर्त और पर्वों की तिथियां स्थानीय पंचांग एवं परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। पूजन से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।






