राजस्थान के स्कूलों की डरावनी तस्वीर: जर्जर भवनों के लिए चाहिए 20 हजार करोड़, भामाशाहों ने सरकार से ज्यादा दिया दान
जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में जर्जर भवनों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रदेश के कई स्कूलों में मरम्मत और निर्माण की जरूरत के मुकाबले सरकारी बजट काफी कम है, जबकि भामाशाहों ने शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार से भी ज्यादा राशि दान कर दी है।
स्कूलों की मरम्मत के लिए चाहिए 20 हजार करोड़
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भवनों की मरम्मत और नए निर्माण के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है। वहीं सरकारी स्तर पर जारी बजट इसके मुकाबले काफी कम है।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने प्रदेश के 1936 बेहद जर्जर सरकारी स्कूल भवनों के बड़े मरम्मत कार्यों के लिए 169.52 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की थी।
भामाशाहों ने खोला खजाना
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले भामाशाहों ने सरकारी प्रयासों से आगे बढ़कर बड़ी मदद की है। आंकड़ों के अनुसार 97 प्रेरकों और राज्य स्तरीय भामाशाहों ने मिलकर 578.46 करोड़ रुपये की राशि शिक्षा विभाग को दान की है।
इसमें राज्य स्तरीय भामाशाहों का योगदान करीब 318 करोड़ रुपये है, जो सरकारी स्वीकृत बजट से भी अधिक है।
बीकानेर के भामाशाह ने दिया सबसे बड़ा योगदान
जोधपुर और बीकानेर संभाग में भी बड़ी संख्या में जर्जर स्कूल चिन्हित किए गए हैं। अकेले जोधपुर में 1091 स्कूल भवन मरम्मत के लिए चिन्हित हैं।
वहीं बीकानेर के पूनम चंद राठी ने 108 करोड़ रुपये से अधिक की राशि देकर शिक्षा सुधार अभियान में बड़ा योगदान दिया है।
कई जिलों में स्कूल भवनों की हालत खराब
जयपुर संभाग में 1332 स्कूल भवनों की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। वहीं उदयपुर जैसे आदिवासी क्षेत्रों में कई भवनों की हालत इतनी खराब है कि मरम्मत के बजाय नए निर्माण की जरूरत बताई गई है।
कोर्ट ने भी जताई थी नाराजगी
स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर चल रही जनहित याचिका में शिक्षा विभाग ने भी माना है कि प्रदेश में बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है। हाईकोर्ट ने भी सरकार के प्रयासों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में तेजी से काम होना चाहिए।
अब चुनौती सही इस्तेमाल की
विशेषज्ञों का कहना है कि भामाशाहों द्वारा दी गई राशि का सही और पारदर्शी उपयोग होना जरूरी है। जर्जर स्कूल भवनों की प्राथमिकता सूची बनाकर उसी के अनुसार काम किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल मिल सके।



