1 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग, सोना-चांदी से लेकर वाहन खरीदने तक के लिए शुभ मान्यता
बीकानेर: दीपावली से पहले 1 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग बनने की जानकारी सामने आई है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में खरीदारी और धार्मिक अनुष्ठान करना विशेष महत्व रखता है। इस दिन सोना-चांदी, भूमि, भवन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदना शुभ माना जाता है। त्योहार से पहले इस संयोग के चलते बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
सोना-चांदी, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी पर नजर
पुष्य नक्षत्र का व्यापारिक दृष्टि से भी विशेष महत्व माना जाता है। परंपरागत रूप से व्यापारी इस दिन नए बही-खाते, कलम और दवात खरीदते हैं। वहीं, श्रद्धालु सोने-चांदी और तांबे के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, पूजन यंत्र, धार्मिक पुस्तकें और अन्य पूजन सामग्री खरीदते हैं।
इस बार सराफा, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े व्यापारियों को अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है। दीपावली से पहले खरीदारी का यह अवसर बाजारों में रौनक बढ़ा सकता है।
पुष्य नक्षत्र को कहा जाता है नक्षत्रों का राजा
ज्योतिषाचार्य पं. सूरज रतन व्यास के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों को महत्व दिया गया है। इनमें पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। इसकी ज्योतिषीय परंपरा में शनि को स्वामी और देवगुरु बृहस्पति को उप-स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि इस संयोग में धार्मिक कार्यों और संपत्ति व सुख-सुविधाओं से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी विशेष फलदायी होती है।
इस बार पुष्य नक्षत्र रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि पुष्य नक्षत्र कहा जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, रविवार का संबंध सूर्य देव से है। शनि और बृहस्पति से जुड़े ग्रह योगों को भी इस संयोग के महत्व से जोड़कर देखा जाता है। ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं।
बताए गए खरीदारी के शुभ मुहूर्त
दी गई जानकारी के अनुसार, 1 नवंबर के लिए निम्न समय शुभ मुहूर्त के रूप में बताए गए हैं:
- लाभ: सुबह 9 बजे से 10:30 बजे तक
- अमृत: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक
- शुभ: दोपहर 1:30 बजे से 3 बजे तक
- शुभ: शाम 5:48 बजे से 7:24 बजे तक
- अमृत: शाम 7:30 बजे से रात 9 बजे तक
सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा
ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, रविवार को सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें थोड़ी हल्दी या लाल चंदन मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जा सकता है। इस दौरान 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने की धार्मिक परंपरा भी बताई गई है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, नौकरी या मान-सम्मान से जुड़ी मनोकामना के लिए गाय को गुड़ खिलाने की परंपरा भी प्रचलित है। ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
बाजार में बढ़ सकती है रौनक
दीपावली से पहले रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग खरीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोना-चांदी, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और पूजन सामग्री के कारोबारियों को त्योहार के सीजन में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है।
Aapni Awaj | धर्म-ज्योतिष समाचार




