35 साल पहले मर चुका था खातेदार, फर्जी बनकर बेच दी करोड़ों की जमीन! पहली गिरफ्तारी
श्रीडूंगरगढ़। खातेदार की करीब 35 साल पहले मौत हो चुकी थी, लेकिन आरोप है कि कुछ लोगों ने धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए मृतक को कागजों में जिंदा दिखाया और करोड़ों रुपये की जमीन का फर्जी तरीके से विक्रय पत्र तैयार करवा दिया। इस सनसनीखेज जमीन धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने अब पहली गिरफ्तारी कर ली है।
जांच अधिकारी मोहनलाल कड़वासरा से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने मामले में कोलायत निवासी संपत दास पुत्र दुलदास स्वामी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि गिरफ्तार आरोपी इस पूरे मामले में षड्यंत्रकारी भूमिका में शामिल था। आरोपी को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड मांगा जाएगा। मामले की जांच के दौरान अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
16 जनवरी को न्यायालय के जरिए दर्ज हुआ था मामला
यह मामला 16 जनवरी 2026 को न्यायालय एसीजेएम श्रीडूंगरगढ़ के जरिए दर्ज हुआ था। परिवादी जितेन्द्र कुमार लुणिया पुत्र मांगीलाल, निवासी श्रीडूंगरगढ़ ने मुख्त्यारआम जितेन्द्र कुमार पुत्र पुनमचंद निवासी आडसरबास के माध्यम से मामला दर्ज करवाया था।
मामले में बजरंगलाल पुत्र शिवदत्त, निवासी श्रीडूंगरगढ़, राहुल पुत्र रमेश, निवासी राजविलास होटल के पास बीकानेर, पवन कुमार पुत्र पेमाराम, निवासी डेलवां तथा दो-तीन अन्य व्यक्तियों पर धोखाधड़ी और फर्जी तरीके से जमीन बेचने का आरोप लगाया गया था।
दादा के नाम दर्ज थी 10.1900 हेक्टेयर जमीन
परिवादी के अनुसार रोही जैतासर स्थित खसरा नंबर 468 की कुल 10.1900 हेक्टेयर भूमि और स्थाई खाता संख्या 431 उनके दादा भैरूदान पुत्र प्रेमचंद लूणिया के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी।
परिवादी ने बताया कि उनके दादा भैरूदान का निधन 29 अगस्त 1991 को हो चुका था। उनके वारिस व्यापार और व्यवसाय के कारण श्रीडूंगरगढ़ से बाहर रहते थे और समय-समय पर खेत की देखभाल के लिए आते-जाते रहते थे। व्यस्तता के कारण मृतक भैरूदान के नाम दर्ज जमीन का विरासत इंतकाल समय पर नहीं करवाया जा सका।
मृत व्यक्ति के नाम से बनाए फर्जी आधार और पैन कार्ड!
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए आपस में षड्यंत्र रचा। आरोप है कि मृतक भैरूदान के नाम से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए।
इसके बाद कथित रूप से एक व्यक्ति को मृतक भैरूदान के स्थान पर पेश कर उसे असली खातेदार के रूप में तस्दीक करवाया गया। आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठा निशानी के आधार पर पंजीयन कार्यालय श्रीडूंगरगढ़ में विक्रय पत्र तैयार करवाकर जमीन को दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज करवा दिया गया।
ऑनलाइन जमाबंदी देखने पर सामने आया बड़ा खेल
परिवादी के अनुसार जब उन्होंने 1 दिसंबर 2025 को खेत की जमाबंदी का रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा तो उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई। रिकॉर्ड में उनके दादा भैरूदान के नाम की जगह आरोपी बजरंगलाल का नाम खातेदार के रूप में दर्ज पाया गया।
आरोप है कि जमीन अपने नाम करवाने के बाद आरोपी की ओर से 21 नवंबर 2025 को पंजाब नेशनल बैंक की श्रीडूंगरगढ़ शाखा से केसीसी भी बनवा ली गई और जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया।
करोड़ों की जमीन को लेकर रची गई साजिश!
मामले में करोड़ों रुपये कीमत की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने नाम करवाने और बेचने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू की। जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर मोहनलाल कड़वासरा और उनकी टीम ने मामले में विभिन्न कड़ियों को जोड़ते हुए अनुसंधान किया।
जांच के बाद पुलिस ने मामले में पहली गिरफ्तारी करते हुए कोलायत निवासी संपत दास पुत्र दुलदास स्वामी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि मामले में अभी जांच जारी है और जांच के दौरान अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने पर आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों, दस्तावेज तैयार करने वालों और जमीन के कथित फर्जी विक्रय से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।





