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ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक इम्तिहान: अमेरिकी चुनाव के बीच ईरान तनाव बढ़ा, भारत पर भी पड़ सकता है असर
वॉशिंगटन। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़े राजनीतिक इम्तिहान के रूप में देखे जा रहे हैं। इन चुनावों के जरिए यह तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—पर अगले दो वर्षों तक किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा। चुनावी नतीजों के साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। इसका असर भारत के व्यापार, तेल कीमतों और विदेश नीति पर भी पड़ सकता है।
कांग्रेस पर नियंत्रण की जंग
मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि सीनेट का मुकाबला करीबी माना जा रहा है। महंगाई, बढ़ती जीवनयापन लागत, आव्रजन नीतियों और ईरान के साथ तनाव जैसे मुद्दों को लेकर ट्रंप प्रशासन को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण हासिल करती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। डेमोक्रेट्स को प्रशासन के फैसलों की जांच कराने और अधिकारियों को संसदीय सुनवाई में बुलाने की अधिक ताकत मिल सकती है।
रिपब्लिकन की जीत से ट्रंप को मिल सकता है समर्थन
वहीं यदि रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण बनाए रखती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप इसे अपनी नीतियों के समर्थन के रूप में पेश कर सकते हैं। इससे उनके प्रशासन को अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में अधिक आसानी हो सकती है।
हालांकि, चुनाव में किसी एक सदन का नियंत्रण खोने का अर्थ राष्ट्रपति पद समाप्त होना नहीं है। राष्ट्रपति के पास वीटो और विदेश नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण अधिकार बने रहते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये चुनाव?
अमेरिकी चुनाव के नतीजों का असर भारत-अमेरिका संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है। यदि डेमोक्रेट्स को कांग्रेस में बहुमत मिलता है तो भारत से जुड़े व्यापार, टैरिफ, H-1B वीजा और आव्रजन नीतियों पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
इसका प्रभाव भारतीय आईटी कंपनियों, अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों और भारतीय निर्यात कारोबार पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी की जीत ट्रंप की मौजूदा व्यापार और आव्रजन नीतियों को राजनीतिक समर्थन दे सकती है।
भारत के लिए अमेरिकी टैरिफ और व्यापारिक रिश्ते महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि अमेरिका भारतीय दवा, टेक्सटाइल, आईटी और इंजीनियरिंग उद्योग के लिए प्रमुख बाजारों में से एक है।
ईरान के साथ बढ़ा सैन्य तनाव
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार के प्रमुख रास्तों में शामिल है।
अमेरिका की ओर से किसी भी सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब में संभावित प्रतिक्रिया से क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, सैन्य घटनाक्रम और नुकसान से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है।
तेल की कीमतें बढ़ीं तो भारत पर बढ़ सकता है दबाव
भारत के लिए पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि सैन्य संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इसका असर भारत के आयात खर्च, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। इससे रुपये पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
ऐसे में अमेरिकी चुनाव के नतीजे और अमेरिका-ईरान के बीच आगे की स्थिति, दोनों ही आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।






