बीकानेर। नगर निगम की सरकारी भूमि जोड़बीड़ और जयपुर रोड स्थित एक कथित अवैध फैक्ट्री में गाय की चर्बी से घी जैसा पदार्थ बनाने के आरोपों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर इस कथित कारोबार से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, चर्बी से घी जैसा पदार्थ बनाने, उसकी सप्लाई और संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
प्रदेश से बाहर तक नेटवर्क होने का दावा
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश का एक व्यक्ति कथित तौर पर स्थानीय मृत पशु उठाने वाली ठेका कंपनी से पशु अवशेष खरीदकर जयपुर रोड स्थित एक फैक्ट्री में उनका संग्रहण करता है। आरोप है कि वहां से घी जैसा पदार्थ तैयार कर देशभर में सप्लाई किया जाता है। इस कथित कारोबार और सप्लाई नेटवर्क की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित फैक्ट्री पहले भी संदेह के घेरे में आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि यहां अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं, तो संबंधित विभागों की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई। मामले में स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन की जांच अहम मानी जा रही है।
मृत पशु उठाने के ठेके को लेकर विवाद
मृत पशुओं को उठाने के ठेके की प्रक्रिया भी विवादों में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में नोखा की फर्म मैसर्स बाबा रामदेव श्रमिक सप्लायर्स के मनोज कुमार ने यह ठेका पहले की तुलना में करीब तीन गुना अधिक राशि पर लिया था। आरोप है कि लगभग तीन महीने बाद ही फर्म का ठेका निरस्त कर दिया गया और पुरानी फर्म को दोबारा काम सौंप दिया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में निगम के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत साबित नहीं हुई है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
21 मई 2025 को जारी हुए तीन आदेश
मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, 21 मई 2025 को नगर निगम आयुक्त की ओर से तीन आदेश जारी किए गए थे। इनमें मैसर्स बाबा रामदेव श्रमिक सप्लायर्स का ठेका निरस्त करने, मृत पशुओं से संबंधित सामग्री अपने कब्जे में लेने और मैसर्स बीके नागौरा स्कीन कंपनी को नया कार्यादेश जारी करने से संबंधित आदेश शामिल बताए गए हैं।
पहले आदेश का क्रमांक 8508, दूसरे का 8525 और तीसरे का 8532 बताया गया है। इन आदेशों में ठेका निरस्त करने के लिए फर्म का काम संतोषजनक नहीं होने का कारण दर्ज होने की बात कही गई है। तीनों आदेश एक ही तारीख को जारी होने और उनकी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं, यह जांच का विषय है।
27 लाख रुपए से अधिक की जमा राशि जब्त करने पर सवाल
मैसर्स बाबा रामदेव श्रमिक सप्लायर्स के मनोज कुमार की ओर से जमा कराई गई 27 लाख रुपए से अधिक की राशि जब्त किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि शिकायतों की पर्याप्त जांच किए बिना ही राशि जब्त कर ठेका निरस्त कर दिया गया। इस संबंध में ठेका शर्तों, शिकायतों और जमा राशि जब्त करने के आधार की समीक्षा जरूरी है।
रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि ठेका शर्तों के उल्लंघन पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई करने के प्रावधानों के बावजूद सीधे ठेका निरस्त करने और धरोहर राशि जब्त करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। इस पहलू पर निगम प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
खाद्य सुरक्षा और प्रशासनिक जांच की मांग
सोशल मीडिया पर कथित कारोबार से जुड़े वीडियो प्रसारित होने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यह मामला केवल धार्मिक भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हो सकता है।
अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग इन आरोपों की जांच के लिए क्या कदम उठाते हैं। कथित फैक्ट्री में तैयार किए जा रहे पदार्थ, उसके स्रोत, संभावित सप्लाई नेटवर्क और मृत पशु उठाने के ठेके की प्रक्रिया की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।







