बीकानेर में 21 किलो की कैंसरग्रस्त अंडाशय की गांठ का जटिल ऑपरेशन, विशेषज्ञ टीम ने की सर्जरी
बीकानेर | Aapni Awaj
बीकानेर के आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर सेंटर में करीब 21 किलोग्राम वजनी अंडाशय की कैंसरग्रस्त गांठ का जटिल ऑपरेशन किया गया। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में हुई इस सर्जरी को गांठ के विशाल आकार और बीमारी की जटिलता के कारण चिकित्सकीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना गया। ऑपरेशन का नेतृत्व कैंसर सर्जन डॉ. देवी सिंह कच्छावा ने किया।
मरीज में कैंसर के प्रसार का आकलन करने और बीमारी की वास्तविक अवस्था जानने के लिए विस्तृत स्टेजिंग लैपरोटॉमी की गई। इस प्रक्रिया में पेट खोलकर गांठ निकालने के साथ पेट और पेल्विस के विभिन्न हिस्सों का बारीकी से निरीक्षण किया जाता है, ताकि कैंसर के संभावित प्रसार का पता लगाया जा सके।
कैंसर के प्रसार का किया विस्तृत परीक्षण
सर्जरी के दौरान डायाफ्राम, लिवर और स्प्लीन की सतह, ओमेंटम, आंतों की सतह, मेसेंटरी और पेल्विक पेरिटोनियम सहित कई महत्वपूर्ण हिस्सों का परीक्षण किया गया। आवश्यकता के अनुसार संबंधित स्थानों से ऊतकों के नमूने लेकर हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए भेजे जाते हैं। इस विस्तृत सर्जिकल स्टेजिंग से कैंसर की अवस्था निर्धारित करने और आगे के उपचार की योजना बनाने में मदद मिलती है।
21 किलो की गांठ निकालना था चुनौतीपूर्ण
करीब 21 किलोग्राम वजनी ट्यूमर को निकालने के दौरान कई चिकित्सकीय चुनौतियां सामने रहीं। इतने बड़े ट्यूमर के कारण आसपास के अंगों पर दबाव, रक्तस्राव की आशंका, शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन और एनेस्थीसिया का प्रबंधन विशेष रूप से महत्वपूर्ण था। लंबे समय तक चली इस सर्जरी में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक रहा।
चिकित्सकों और नर्सिंग टीम का रहा योगदान
एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कांता भाटी, डॉ. विशाल देवड़ा और डॉ. अक्षय ने ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया एवं मरीज की निगरानी की जिम्मेदारी निभाई। ऑपरेशन थिएटर में नर्सिंग ऑफिसर्स कृष्णा स्वामी, अभिलाषा, कल्पना और सुनील ने सक्रिय सहयोग दिया। वहीं ओटी अटेंडेंट विश्वामित्र ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस जटिल और लंबे ऑपरेशन में सर्जिकल, एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम के सभी सदस्यों का योगदान सराहनीय रहा।
विशेषज्ञता और टीमवर्क का उदाहरण
यह सर्जरी कैंसर के जटिल मामलों में आधुनिक सर्जिकल तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता, सटीक सर्जिकल स्टेजिंग और विभिन्न चिकित्सा विभागों के सामूहिक प्रयासों की अहमियत को दर्शाती है।






