बीकानेर में फिर गूंजेगी शेर की दहाड़, मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क को मिली मंजूरी

09 Oct 2026 BIKANER
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बीकानेर में फिर गूंजेगी शेर की दहाड़, मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क को मिली मंजूरी

बीकानेर। बीकानेर में एक बार फिर शेर की दहाड़ सुनाई देने की उम्मीद जगी है। मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क शुरू करने के लिए भारत सरकार से सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि पार्क का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद देश के विभिन्न चिड़ियाघरों से वन्यजीवों को यहां लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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वन्यजीव सप्ताह-2026 के समापन अवसर पर राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजुवास) के सभागार में आयोजित समारोह में यह जानकारी दी गई। उप वन संरक्षक, वन्यजीव तरुण कुमार मेहरा ने बताया कि पार्क को शुरू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। निरीक्षण और रिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एनिमल एक्सचेंज प्लान के तहत वन्यजीवों को यहां लाने की योजना पर आगे काम होगा।

दो दशक पहले पब्लिक पार्क में सुनाई देती थी शेर की दहाड़

बीकानेर के पब्लिक पार्क स्थित चिड़ियाघर में करीब दो दशक पहले तक सुबह की शुरुआत शेर की दहाड़ के साथ होती थी। शेर की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की बात कही जाती है। अब मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क विकसित होने से शहर में एक बार फिर शेर देखने और उसकी दहाड़ सुनने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, पार्क में शेर समेत अन्य वन्यजीवों को लाने की प्रक्रिया निरीक्षण और आगे की मंजूरियों पर निर्भर करेगी।

वन्यजीव संरक्षण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई

वन्यजीव सप्ताह के समापन समारोह में वन्यजीव रेस्क्यू और जोड़बीड-गाढ़वाला कंजर्वेशन रिजर्व पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। इसके साथ ही वन्यजीव फोटोग्राफी प्रदर्शनी और प्रतियोगिता आयोजित हुई। प्रतियोगिता में प्राप्त प्रविष्टियों का निर्णायक मंडल ने मूल्यांकन किया।

मुख्य अतिथि राजुवास के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने थार मरुस्थल में दूर-दूर स्थित वन क्षेत्रों को आपस में जोड़कर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवों से समाज को संतुलन और संयम की सीख लेनी चाहिए।

बीछवाल में विकसित किया गया डेजर्ट बॉटनिकल गार्डन

समारोह की अध्यक्षता करते हुए जिला कलेक्टर निशांत जैन ने मरुस्थलीय वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए वन विभाग की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र को समझना और उसका संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों और आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसी गतिविधियां लगातार आयोजित की जानी चाहिए।

संभागीय मुख्य वन संरक्षक सेडूराम यादव ने थार इकोसिस्टम की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने गिद्धों को पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण प्राकृतिक सफाईकर्मी बताते हुए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को आपस में जोड़ने की आवश्यकता बताई। वन्यजीव सप्ताह-2026 की थीम Connecting Habitats and Thriving Wildlife रही।

उन्होंने बताया कि बीछवाल क्षेत्र में मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क से लगी वन भूमि पर डेजर्ट बॉटनिकल गार्डन भी विकसित किया गया है। यहां थार क्षेत्र की विभिन्न पादप प्रजातियां लगाई गई हैं। इससे विद्यार्थियों और आमजन को मरुस्थलीय वनस्पतियों तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी।

वन्यजीव प्रेमियों और सेवानिवृत्त वनकर्मियों का सम्मान

समारोह में वन्यजीव सप्ताह के आयोजन में सहयोग देने वाले भामाशाहों, वन्यजीव प्रेमियों, जीवविज्ञानियों, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण एवं वनस्पति सर्वेक्षण विभाग, जोधपुर के प्रतिनिधियों और सहयोगी संस्थाओं के सदस्यों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त वनकर्मियों और वन अधिकारियों का भी अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान वाद-विवाद, निबंध लेखन, क्विज, फोटोग्राफी, पोस्टर मेकिंग और रंगोली प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। समापन पर सहायक वन संरक्षक कमल चंद ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी प्रतिभागियों और संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

वन्यजीव सप्ताह-2026 के तहत आयोजित गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं और आमजन को वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता तथा प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और संरक्षण कार्यों में जनभागीदारी बढ़ाना रहा।

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