बीकानेर की नई सफाई व्यवस्था फेल! 18वें दिन भी कचरा उठाव नहीं सुधरा, 85 टिपर अब भी बाकी
बीकानेर। शहर में नई सफाई व्यवस्था की शुरुआत गंभीर लापरवाही और कुव्यवस्था के बीच हुई है। नगर निगम के कार्यालय के सामने वाली गली और वार्ड 52 में पिछले 15 दिनों से कचरे के बड़े ढेर पड़े हैं। निगम ने सभी 80 वार्डों में एक-एक टिपर चलाने का दावा किया था, लेकिन कई वार्डों में वाहन पहुंच ही नहीं पाए। इसके चलते नई व्यवस्था शुरू होने के 18वें दिन भी शहर में कचरा संग्रहण पूरी तरह सुचारु नहीं हो सका है।
ड्राइवरों को रूट और वार्ड सीमाओं की जानकारी नहीं
नई व्यवस्था के तहत लगाए गए टिपर चालकों को रूट और वार्डों की सीमाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके चलते कई वाहन चालक असमंजस की स्थिति में रूट तलाशते नजर आए। शहरभर के पार्षदों ने भी अपने वार्ड ग्रुपों में लगातार शिकायतें साझा कीं कि उनके क्षेत्रों में टिपर नहीं पहुंच रहे हैं।
जब नगर निगम के कार्यालय के आसपास और वार्ड 52 जैसे क्षेत्रों में ही कचरे के ढेर लगे हैं तो दूर-दराज के वार्डों में सफाई व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
18 अगस्त को जारी हुआ था वर्क ऑर्डर
नई सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम की ओर से 18 अगस्त को नई फर्म को कचरा उठाने का वर्क ऑर्डर जारी किया गया था। पुरानी फर्म का कार्यकाल 16 सितंबर को समाप्त होना था और 17 सितंबर से नए टिपरों का संचालन शुरू किया जाना था।
हालांकि, नई फर्म समय पर निर्धारित संख्या में टिपर नहीं ला सकी। शहर में कचरे के ढेर बढ़ने और राजनीतिक दबाव के बाद वाहनों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई गई।
185 टिपर आने थे, अभी भी 85 बाकी
जानकारी के अनुसार 30 सितंबर तक केवल 55 टिपर शहर में पहुंचे थे। इसके बाद 2 अक्टूबर तक यह संख्या बढ़कर 80 टिपर हुई। जबकि कुल 185 टिपर आने थे। इस हिसाब से निर्धारित संख्या के मुकाबले अभी भी करीब 85 टिपर शहर में पहुंचना बाकी हैं।
इसी बीच 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने जयपुर से जिन 15 टिपरों को हरी झंडी दिखाई थी, वे भी रविवार रात तक बीकानेर पहुंच गए। इसके बावजूद निर्धारित संख्या पूरी नहीं हो सकी है।
16 दिनों में 60 हजार टन से अधिक कचरा जमा होने का दावा
नई व्यवस्था शुरू होने के बाद बीते 16 दिनों में शहर में 60 हजार टन से अधिक कचरा पसरने की बात सामने आई है। टिपरों की कमी और रूट व्यवस्था को लेकर सामने आई शिकायतों के कारण शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है।
अब निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी निर्धारित टिपरों को जल्द शहर में उतारने और वार्डवार रूट व्यवस्था को सुचारु करने की है, ताकि शहर में जमा कचरे का उठाव नियमित रूप से शुरू हो सके।






