गांवों में अब सरकार से मुफ्त पैसा नहीं! टैक्स नहीं बढ़ाया तो पंचायतों की ग्रांट होगी बंद
राजस्थान: ग्राम पंचायतों के लिए केंद्र सरकार ने फंड को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब पंचायतों को केवल सरकारी बजट के भरोसे विकास कार्य चलाना आसान नहीं होगा। 16वें वित्त आयोग के नए नियमों के अनुसार पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने के लिए टैक्स और यूजर चार्ज वसूलने होंगे।
नई गाइडलाइन के तहत जो ग्राम पंचायतें अपनी खुद की आय बढ़ाने में पीछे रहेंगी, उनकी परफॉर्मेंस ग्रांट रोकी जा सकती है। राज्य सरकार ने जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी करने शुरू कर दिए हैं।
अब पंचायतों को हर परिवार से जुटाने होंगे 1200 रुपये
गाइडलाइन के अनुसार पंचायत क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे प्रति परिवार न्यूनतम 1200 रुपये सालाना तक राजस्व जुटाया जा सके। इसके लिए पंचायतें अलग-अलग स्थानीय कर और यूजर चार्ज लागू कर सकती हैं।
- आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर टैक्स
- प्रकाश कर (स्ट्रीट लाइट व्यवस्था के लिए)
- सफाई कर और कचरा प्रबंधन शुल्क
- मेले, हाट-बाजार और अन्य स्थानीय कर
- जल उपभोक्ता शुल्क
75% पंचायतें पात्र होंगी तभी मिलेगा फंड
नई व्यवस्था में पंचायत समितियों को भी फंड तभी मिलेगा जब उनके क्षेत्र की कम से कम 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतें परफॉर्मेंस ग्रांट के लिए पात्र होंगी। पात्रता पूरी नहीं होने पर 20 प्रतिशत तक कटौती का प्रावधान रखा गया है।
80% बेसिक और 20% परफॉर्मेंस ग्रांट
16वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिलने वाले अनुदान को 80:20 के अनुपात में बांटा गया है।
80 प्रतिशत बेसिक ग्रांट: इसमें टाइड और अनटाइड अनुदान शामिल होंगे। टाइड राशि का उपयोग स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और जल व्यवस्था जैसे कार्यों में करना होगा।
20 प्रतिशत परफॉर्मेंस ग्रांट: इसके लिए पंचायतों को अपनी आय में वृद्धि दिखानी होगी।
परफॉर्मेंस ग्रांट के लिए ये शर्त जरूरी
पंचायत को पिछले साल की तुलना में अपनी आय कम से कम 1.025 गुना बढ़ानी होगी या फिर वर्ष 2025-26 की आय पर हर साल 2.5 प्रतिशत चक्रवृद्धि वृद्धि दिखानी होगी।
अब ऑनलाइन देना होगा पूरा हिसाब
सरकार ने साफ कर दिया है कि अब केवल कागजी दावों से काम नहीं चलेगा। पंचायतों को अपनी योजनाएं और खर्च का पूरा विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होगा।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर सभी पंचायतों की 100 प्रतिशत ऑनबोर्डिंग के निर्देश दिए गए हैं।
नए नियमों से ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों की कार्यप्रणाली और आर्थिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।




