पंचायत-निकाय चुनाव को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, सोमवार को होगा बड़ा फैसला

19 Jul 2026 STATE
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राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव की तारीख तय? 15 अगस्त से 15 नवंबर के बीच वोटिंग की तैयारी, सोमवार को होगा बड़ा फैसला

जयपुर. राजस्थान सरकार ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद 15 अगस्त से 15 नवंबर 2026 के बीच चुनाव कराने पर सहमति बनी है। तैयार रिपोर्ट को रविवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंजूरी के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा और सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा।

शनिवार को हुई बैठक में महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, राज्य निर्वाचन आयोग, अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक) आयोग के प्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा, स्वायत्त शासन सचिव रवि जैन तथा पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुई प्रक्रिया

पंचायत और निकाय चुनाव में लगातार हो रही देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में नाराजगी जताते हुए अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी थी। सोमवार को होने वाली सुनवाई में सरकार को ओबीसी सर्वे, आरक्षण लॉटरी और चुनाव कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत करनी है।

31 जुलाई तक ओबीसी सर्वे पूरा करने का लक्ष्य

सूत्रों के अनुसार बैठक में ओबीसी (राजनीतिक) आयोग को 31 जुलाई तक सर्वे पूरा कर 5 अगस्त तक रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभाग करीब 10 दिनों में आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी करेंगे। एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों की सूची राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी।

राज्य निर्वाचन आयोग को यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 अगस्त से 15 नवंबर के बीच 90 दिनों के भीतर चुनाव संपन्न कराने की तैयारी करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक चली रणनीतिक बैठक

चुनाव की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री आवास पर शनिवार देर रात तक भाजपा नेताओं की रणनीतिक बैठक भी हुई। बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़, अरुण चतुर्वेदी, अशोक परनामी सहित संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

निर्वाचन आयुक्त की पेशी पर भी उठे सवाल

सूत्रों के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयुक्त जैसे संवैधानिक पदाधिकारी को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए जाने पर भी चर्चा हुई। इस दौरान सरकारी अधिवक्ताओं की ओर से हाईकोर्ट में आपत्ति दर्ज नहीं कराने को लेकर भी नाराजगी जताई गई।

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